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एक्स्ट्रा फीस देने पर भी नहीं मिलेगा जल्दी H1B वीजा, अमेरिका में नया नियम

एक्स्ट्रा फीस देने पर भी नहीं मिलेगा जल्दी H1B वीजा, अमेरिका में नया नियम

अमेरिका सरकार ने प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस की टाइमलाइन में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे विदेशी वर्कर्स, स्टूडेंट्स और कंपनी के लिए जल्द वीजा या ग्रीन कार्ड मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह प्रस्ताव फिलहाल ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के समक्ष है और लागू होने से पहले कई मंजूरी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस का प्रभाव

USCIS की प्रीमियम प्रोसेसिंग सेवा के तहत एक्स्ट्रा फीस देकर वीजा, ग्रीन कार्ड या वर्क परमिट आवेदन की प्रक्रिया तेज़ करने का विकल्प होता है। यह सेवा 1780 डॉलर से लेकर 2965 डॉलर के बीच होती है, और आवेदन की प्रकृति के अनुसार 15 से 45 कार्य दिवस के भीतर फैसले का वादा करती है। मगर, फीस देने का मतलब यह नहीं कि मंजूरी समय पर सुनिश्चित है; USCIS अनिवार्य दस्तावेज मांग या आवेदन खारिज कर सकता है।

हालांकि, हाल के महीनों में USCIS ने इन निर्धारित समय-सीमाओं को कई बार पार किया है, यहां तक कि उन मामलों में भी जहां प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस का भुगतान किया गया था।

भारतीय स्टूडेंट और वर्कर्स पर संभावित असर

भारतीय H-1B, L-1 और अन्य वीजा कैटेगरी के वर्कर्स के लिए इस बदलाव का असर महत्वपूर्ण होगा। उदाहरण के लिए, I-129 फॉर्म के तहत वीजा प्रक्रियाओं में वे प्रीमियम प्रोसेसिंग के जरिए जल्दी परिणाम की उम्मीद करते हैं, जो अब प्रभावित हो सकती है। ग्रीन कार्ड के लिए I-140 फॉर्म पर भी यही स्थिति लागू होगी, जो कई भारतीय पेशेवरों के लिए जरूरी है।

करीब कुछ श्रेणियों में, जैसे EB-1 कैटेगरी के लिए 45 कार्य दिवस की टाइमलाइन रखी गई है, जबकि EB-2 ‘नेशनल इंटरेस्ट वेवर’ जैसी पिटीशन पर भी इसी तरह की समय सीमा लागू है।

अमेरिका में F-1 स्टूडेंट वीजा धारक जो OPT प्रोग्राम का लाभ उठाते हैं, उन्हें भी 30 कार्य दिवस में फॉर्म I-765 के अनुमोदन की उम्मीद होती है। इसके साथ ही अन्य वर्क वीजा और इमिग्रेशन फार्म जैसे I-129 और I-539 पर 15 से 45 कार्य दिवस की टाइमलाइन होती है।

अगर नई टाइमलाइन लागू हुई, तो भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी और वर्क ऑथराइजेशन में देरी का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके अमेरिका में कामकाजी जीवन को प्रभावित करेगा। कंपनियों को भी इस देरी का ख्याल रखते हुए अपनी प्लानिंग करनी होगी।

कुल मिलाकर, प्रीमियम प्रोसेसिंग की वर्तमान सुविधा में प्रस्तावित बदलाव से भारतीय वर्कर्स, स्टूडेंट्स और उनके नियोक्ताओं के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी। अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग की ओर से ये बदलाव फिलहाल समीक्षा के अधीन हैं और आगे के फैसले का इंतजार है।

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