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डल झील में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली जेट स्की पर हाईकोर्ट ने बैन लगाया

डल झील में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली जेट स्की पर हाईकोर्ट ने बैन लगाया

श्रीनगर स्थित जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने डल झील में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली सभी मोटरबॉट्स और जेट स्की पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले के पीछे झील में बढ़ रहे प्रदूषण को मुख्य कारण बताया गया है। स्थानीय जानकारों ने इस आदेश का स्वागत किया है और इसे डल झील के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम माना है।

निर्णय का कारण और प्रभाव

हाईकोर्ट ने झील के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी ईंधन से चलने वाली मोटरबॉट्स, जिसमें मोटर वाली शिकारे और जेट स्की शामिल हैं, पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में डल झील में लगभग 165 मोटरबॉट्स चल रहे हैं, जिन पर यह रोक प्रभावी होगी।

न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सौर ऊर्जा या इलेक्ट्रिक नावों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया है, ताकि पर्यटन को बनाए रखा जा सके और साथ ही झील को प्रदूषण से बचाया जा सके।

प्रभावित समूहों की प्रतिक्रिया

यह आदेश मोटरबोट्स चलाने वाली कई एसोसिएशन्स के लिए चिंता का विषय बन गया है। दशक भर से डल झील में मोटरबोट्स चलाने वाले लोग इस फैसले को अपने रोजगार के लिए खतरा मान रहे हैं। पर्यावरण जानकार और हाउसबोट मालिक तारिक पतलु ने कहा कि उनके पास संबंधित विभागों से आवश्यक NOCs मौजूद हैं, लेकिन वह अपनी लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं करवा पाए हैं।

श्रीनगर में पर्यटन के लिए प्रसिद्ध इस झील में जेट स्की चलाने की शुरुआत आर्टिकल 370 हटने के बाद हुई थी, जिससे जुड़े लोगों को अब न्यायालय के आदेश के बाद काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

हालांकि, प्रशासन की नावों को, जो आपातकालीन सेवाओं, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए उपयोग होती हैं, इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह मोटरबोटों के लिए व्यापक नीति बनाए, जिसमें विशेषज्ञों की सलाह शामिल हो, ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके और पर्यटन तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रहे।

जानकारों का मानना है कि डल झील जैसे संवेदनशील स्थल को वोट बैंक या राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे सुरक्षित करने के लिए सख्ती से कदम उठाने जरूरी हैं। यह निर्णय डल झील के भविष्य और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

अदालत के इस निर्देश से डल झील में पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है और भविष्य में प्रदूषण घटाने में यह आयोजन एक मॉडल साबित होगा। यह कदम स्थानीय समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों दोनों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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