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हूतियों के हमलों से त्रस्त सऊदी, मिस्र ने दी सुरक्षा सहायता का वादा

हूतियों के हमलों से त्रस्त सऊदी, मिस्र ने दी सुरक्षा सहायता का वादा

सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण यह देश पूरी तरह से सतर्क हो गया है। इस बीच, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने रविवार को स्पष्ट किया कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए हर संभव मदद प्रदान करने को तैयार हैं। यह घोषणा तब हुई है जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ और रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले तेज कर दिए हैं।

मिस्र का सुरक्षा सहयोग और संसद का आपातकालीन सत्र

मिस्र के राष्ट्रपति ने संसद का एक आपातकालीन सत्र बुलाया है जिसमें सेना को अधिकार दिया जाएगा कि वे आवश्यकतानुसार सऊदी अरब की सहायता करें। मिस्र की सेना क्षेत्र की सबसे बड़ी और सशक्त सेनाओं में गिनी जाती है। इस कदम का उद्देश्य सऊदी अरब की सांप्रदायिक स्थिरता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है।

हाल ही में, यमन में संघर्ष-विराम टूट चुका है जिससे सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई फिर से शुरू हो गई है। मिस्र सरकार ने कहा कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा, इसके संसाधनों और इस्लामी पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हर संभव योगदान देंगे।

राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक और राजनीतिक समर्थन

राष्ट्रपति अल-सीसी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक हुई, जिसमें संसद के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख भी मौजूद थे। इस बैठक के बाद संसद ने दोपहर 1 बजे (1000 GMT) को आपातकालीन सत्र आयोजित किया। इस सत्र में प्रस्ताव पर मतदान किया गया।

मिस्र और सऊदी अरब के बीच गहरे रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं। 2013 में इस्लामी राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के सत्ता से हटाए जाने के बाद सऊदी अरब ने मिस्र को अरबों डॉलर की सहायता प्रदान की थी। यह सहयोग यमन संकट में भी दिखाई दिया, जहां मिस्र सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा था।

रविवार को राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा कि वे सऊदी अरब के किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देशों का पालन करेंगे। इसके पहले 15 सितंबर को मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी, ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सके।

यमन में बढ़ते संघर्ष के बीच मिस्र की यह पहल सऊदी अरब में सुरक्षा को बहाल करने में महत्व रखती है। हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार हमले क्षेत्र में कहीं भी स्थिरता लाने की कोशिशों को बाधित कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा सहायक देशों की भूमिका और बढ़ गई है।

यह स्पष्ट है कि मिस्र और सऊदी अरब न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए साथ काम कर रहे हैं। पूरा क्षेत्र अभी इस संकट से निपटने के लिए संवेदनशील बना हुआ है, और मिस्र की यह सहायता सऊदी अरब के लिए एक बड़ा समर्थन साबित हो सकती है।

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