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खरगे की ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ टिप्पणी पर कांग्रेस का पलटवार, RSS का दिया संदर्भ

नई दिल्ली, बिहार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद जारी है। कांग्रेस ने खरगे का बचाव करते हुए कहा है कि उनके बयान का संदर्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से था। पार्टी के मुताबिक, बिहार के पटना में भाषण के दौरान एक भाजपा कार्यकर्ता ने पहले खरगे के दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी की थी। कांग्रेस का कहना है कि इसके जवाब में खरगे ने प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक के रूप में RSS का जिक्र किया था।

पवन खेड़ा ने बताया बयान का संदर्भ

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने रविवार को खरगे के बयान पर सफाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता ने भाषण के दौरान खरगे के पिता को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

खेड़ा के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता ने कहा था कि खरगे के पिता भी आ जाएं तो मोदी नहीं जाएंगे। इसके बाद खरगे ने कहा कि केवल मोदी ही नहीं जाएंगे, बल्कि RSS भी जाएगा। कांग्रेस ने इसी संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि खरगे की टिप्पणी को प्रधानमंत्री के परिवार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

पवन खेड़ा ने भाजपा पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है। खेड़ा ने खरगे के भाषण के बाद शुद्धीकरण जैसी घटना का भी उल्लेख किया और इसे निंदनीय बताया।

भूपेश बघेल ने भी किया खरगे का बचाव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भी इस मामले में खरगे का समर्थन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी टिप्पणी में अपमानजनक क्या है। बघेल ने कहा कि इस तरह की अभिव्यक्ति बोलने का एक तरीका है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह लगातार ऐसी बातें करते हैं, जिन्हें विपक्ष अपमानजनक मानता है। बघेल के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने अध्यक्ष के साथ खड़ी है।

RSS को लेकर कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस का कहना है कि खरगे की टिप्पणी का संदर्भ RSS था, जिसे पार्टी प्रधानमंत्री का वैचारिक मार्गदर्शक बताती है। पवन खेड़ा ने इसी आधार पर बयान का बचाव किया।

हालांकि, प्रधानमंत्री के पिता को लेकर इस्तेमाल किए गए शब्दों के कारण यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष के बयान की व्याख्या करते हुए भाजपा कार्यकर्ता की कथित टिप्पणी को इसकी पृष्ठभूमि बताया है।

इस पूरे विवाद ने राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाली भाषा और नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

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