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इजरायल में त्रिशंकु संसद के बाद सियासी घमासान, नेतन्याहू ने लगाया विदेशी हस्तक्षेप का आरोप

यरुशलम, इजरायल। इजरायल में चुनाव के बाद किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से त्रिशंकु संसद की स्थिति बन गई है। इसके बाद देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए आरोप लगाया है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी गई। उन्होंने इसे इजरायल की चुनाव व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है।

नेतन्याहू ने बुधवार को चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। अपने ताजा बयान में उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के प्रयासों के पीछे इजरायल की संसद पर नियंत्रण हासिल करने और देश के इस्लामीकरण की साजिश हो सकती है।

प्रधानमंत्री के इन बयानों के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, विदेशी हस्तक्षेप और मतदाताओं को कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव समिति के प्रमुख जस्टिस नोआम सोलबर्ग ने विदेशी धन के जरिए चुनाव को प्रभावित करने के आरोपों की जांच खुफिया एजेंसी शिन बेट को सौंप दी है। इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसी आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।

इजरायल के राष्ट्रपति आइजक हरजोग ने भी मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच जल्द पूरी करने को कहा है। जांच का उद्देश्य आरोपों की वास्तविकता का पता लगाना और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करना है।

चुनाव के बाद त्रिशंकु संसद बनने से इजरायल में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो गई हैं। किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच समर्थन जुटाने और संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की आवश्यकता पड़ सकती है।

इस बीच, अरब पार्टियों की जीत को लेकर भी नेतन्याहू ने सवाल उठाए हैं। उनके बयानों ने चुनाव परिणामों और देश की राजनीतिक दिशा को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया है।

फिलहाल विदेशी हस्तक्षेप और चुनाव में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

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