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किसानों को QR कोड से मिलेगी खाद? अकेले मध्य प्रदेश में बचे ₹764 करोड़! खाद सब्सिडी पर लगाम लगाने की तैयारी में केंद्र

नई दिल्ली, भारत। केंद्र सरकार खाद सब्सिडी पर बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने के लिए खाद की बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत किसानों को उनकी जमीन और फसल के आधार पर सब्सिडी वाली खाद का निर्धारित कोटा दिया जा सकता है। इस कोटे को QR कोड से जोड़ने की योजना है, ताकि खाद का वितरण जरूरत के अनुसार हो और सब्सिडी का दुरुपयोग रोका जा सके।

इस नई व्यवस्था को एग्रीस्टैक के आधार पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत किसानों की जमीन और खेती से संबंधित जानकारी का उपयोग करके यह तय किया जा सकता है कि उन्हें कितनी खाद की जरूरत है। खाद प्राप्त करने के लिए किसान की पहचान QR कोड और आधार के माध्यम से सत्यापित करने की योजना है। इसके अलावा, किसानों को उनके क्षेत्र में निर्धारित खाद विक्रेताओं के जरिए खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

कालाबाजारी और सब्सिडी के दुरुपयोग पर रोक लगाने की कोशिश

सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सब्सिडी वाली खाद को वास्तविक किसानों तक पहुंचाना है। प्रस्तावित व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी, गैर-कृषि कार्यों में इसके इस्तेमाल और दूसरे देशों में इसकी तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, इस योजना को लागू करने की तैयारी चल रही है और इसे देशभर में लागू करने के लिए राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों का सहयोग जरूरी होगा।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। केंद्र सरकार इस बैठक में राज्यों से खाद बिक्री के नए ढांचे को अपनाने का आग्रह कर सकती है।

राज्यों की भूमिका होगी अहम

प्रस्तावित ढांचे के तहत खाद की बिक्री और वितरण को किसानों की वास्तविक जरूरत से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, इसे पूरे देश में लागू करने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर अभी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। योजना की सफलता राज्यों के सहयोग, किसानों की सही जानकारी और खाद विक्रेताओं के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो खाद वितरण की निगरानी अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इससे सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल अधिक प्रभावी ढंग से करने और खाद की उपलब्धता को जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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