दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

इजरायल में सरकार गठन को लेकर सियासी घमासान तेज, नेतन्याहू विरोधियों ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की

तेल अवीव, इजरायल। इजरायल में चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी दल अब एकजुट होकर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विपक्षी खेमे में गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के गठबंधन के बीच सरकार गठन को लेकर बातचीत जारी है।

इस बीच विपक्षी दलों के बीच संसद नीसेट के स्पीकर आमिर ओहाना को पद से हटाने के मुद्दे पर सहमति बनने की खबर है। ओहाना को नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का करीबी नेता माना जाता है। विपक्षी दलों का मानना है कि संसद में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्हें एकजुट होकर रणनीतिक फैसले लेने होंगे।

स्पीकर को हटाने पर विपक्षी दलों में सहमति

सरकार गठन को लेकर जारी बातचीत के बीच विपक्षी दलों ने संसद के मौजूदा स्पीकर आमिर ओहाना को हटाने के मुद्दे पर एकमत होने के संकेत दिए हैं। यह फैसला नेतन्याहू खेमे के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। संसद में शुक्रवार को होने वाले पहले सत्र से पहले विपक्षी दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव

इजरायल में बार-बार सरकार गठन में आने वाली बाधाओं के बीच प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे चुनाव कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा तेज हो गई है। इस व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता द्वारा किए जाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस प्रस्ताव पर मौजूदा विपक्षी खेमे में चर्चा शुरू हुई है। यदि सरकार गठन को लेकर सहमति नहीं बनती है तो शुक्रवार को गठित होने वाली संसद के पहले ही सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में भी किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का सुझाव दिया था।

प्रमुख शहरों में हुए प्रदर्शन

इजरायल के राजनीतिक हालात के बीच तेल अवीव, हाइफा समेत देश के प्रमुख शहरों में प्रदर्शन भी हुए हैं। चुनाव के बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता और सरकार गठन को लेकर जनता के बीच भी चर्चा तेज है।

फिलहाल विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद एक साझा सरकार बनाने की है। आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और गठबंधन की बातचीत से इजरायल की राजनीति की अगली दिशा तय होने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!