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भारत की स्वदेशी बुलेट ट्रेन निर्माण के अंतिम चरणों की ओर, अश्विनी वैष्णव ने साझा किया वीडियो; 280 किमी प्रति घंटे होगी रफ्तार

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।

भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई बुलेट ट्रेन की निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। बेंगलुरु स्थित BEML की निर्माण इकाई में ट्रेन के ढांचे को तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही हाई-स्पीड संचालन के दौरान सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के संरचनात्मक परीक्षण किए जा रहे हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस परियोजना की झलक दिखाई।

यह B28 ट्रेनसेट इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और BEML के सहयोग से बनाया जा रहा है। इसे 280 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके ट्रैक ट्रायल 2027 के मध्य तक शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर हो रहा निर्माण

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्माण इकाई के निरीक्षण के दौरान ट्रेन के विभिन्न हिस्सों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रेन की छत, साइड पैनल, साइड की दीवारें, ड्राइवर कैब और पिछले हिस्से की दीवारों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है।

ट्रेन का ढांचा तेज गति से चलने के दौरान पैदा होने वाले दबाव को सहन कर सके, इसके लिए विशेष परीक्षण किए जा रहे हैं। इनमें स्क्वीज टेस्ट प्रमुख है। रेल मंत्री के अनुसार, जब ट्रेन बहुत तेज रफ्तार से चलती है तो उसके आसपास हवा के दबाव में बदलाव और वैक्यूम जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में ट्रेन की संरचनात्मक मजबूती की जांच जरूरी है।

पहला बॉडी फ्रेम हो चुका है तैयार

अक्टूबर की शुरुआत में अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी थी कि B28 ट्रेनसेट का पहला बॉडी फ्रेम तैयार हो चुका है। फिलहाल इसके स्ट्रक्चरल परीक्षण किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ट्रेन हाई-स्पीड संचालन की परिस्थितियों में सुरक्षित और मजबूत बनी रहे।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस परियोजना से जुड़ा एक अन्य वीडियो साझा किया है। इसमें ट्रेन के साइड पैनल के निर्माण की प्रक्रिया दिखाई गई है।

B35 ट्रेनसेट भी है योजना का हिस्सा

भारत के स्वदेशी हाई-स्पीड रेल कार्यक्रम के अगले चरण में B35 ट्रेनसेट विकसित करने की योजना है। इसे 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के लिए तैयार किया जाना है। B28 और B35 जैसी परियोजनाओं के माध्यम से देश में हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण की स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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