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IDBI Bank Strike: निजीकरण के विरोध में 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल, 10 हजार से अधिक कर्मचारी होंगे शामिल

नई दिल्ली, दिल्ली। आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारियों ने 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी की है। कर्मचारी संगठन ने केंद्र सरकार से बैंक की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बैंक की मजबूत वित्तीय स्थिति को देखते हुए निजीकरण की आवश्यकता पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

 

यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। यह संगठन बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के खिलाफ कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए हड़ताल का रास्ता चुना है।

फेयरफैक्स खरीदेगी 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी

आईडीबीआई बैंक में कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। इस प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये बताया गया है।

इसमें केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है। दोनों की हिस्सेदारी मिलाकर कुल 60.72 प्रतिशत होती है।

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स से भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स जुड़े हैं। प्रस्तावित सौदे को लेकर बैंक के कर्मचारी संगठन ने आपत्ति जताई है।

बैंक की वित्तीय स्थिति का दिया हवाला

कर्मचारी संगठन का तर्क है कि आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है। ऐसे में बैंक का निजीकरण करने के बजाय उसकी मौजूदा व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।

संगठन ने सरकार से इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है। कर्मचारियों का विरोध मुख्य रूप से बैंक में हिस्सेदारी बिक्री और प्रस्तावित निजीकरण के फैसले को लेकर है।

बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है असर

दो दिनों की प्रस्तावित हड़ताल से आईडीबीआई बैंक की विभिन्न शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। ग्राहकों को शाखा से संबंधित सेवाओं में देरी का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, सेवाओं पर वास्तविक असर कर्मचारियों की भागीदारी और शाखाओं की स्थिति पर निर्भर करेगा। इस बीच बैंक कर्मचारियों के आंदोलन और निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।

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