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दवा कंपनियों पर सरकार का नया प्रस्ताव, बिना अधिकृत विशेषज्ञ की मंजूरी के बाजार में नहीं आएगा कोई बैच

नई दिल्ली, दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार दवा निर्माण से जुड़े नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि दवा निर्माता कंपनियों को प्रत्येक बैच जारी करने के लिए एक योग्य और अनुभवी व्यक्ति नियुक्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही हर तैयार बैच का पूरा रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना पड़ेगा।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को इस प्रस्ताव की जानकारी दी। यह बदलाव औषधि नियम, 1945 में संशोधन के माध्यम से लाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य दवा निर्माण प्रक्रिया में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

क्या है बैच रिलीज की प्रक्रिया?

दवा निर्माण में बैच रिलीज एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें तैयार दवाओं की गुणवत्ता, परीक्षण रिपोर्ट और निर्माण से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है। निर्धारित गुणवत्ता मानकों की पुष्टि के बाद ही संबंधित बैच को बाजार में जारी किया जाता है।

मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस के लिए कंपनियों को निर्माण और परीक्षण के लिए जिम्मेदार सक्षम तकनीकी कर्मचारियों की जानकारी देनी होती है। हालांकि, बैच जारी करने के लिए अधिकृत व्यक्ति का नाम बताने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

नए नियमों में क्या होगा बदलाव?

प्रस्तावित संशोधन के लागू होने पर दवा निर्माताओं को प्रत्येक बैच जारी करने के लिए एक उपयुक्त और अनुभवी व्यक्ति नामित करना होगा। यह व्यक्ति बैच रिलीज से जुड़ी जिम्मेदारी संभालेगा। इसके साथ ही कंपनी को प्रत्येक बैच का निर्धारित रिकॉर्ड भी रखना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बैच रिलीज प्रमाणपत्र के लिए एक निर्धारित प्रारूप लागू करने का भी प्रस्ताव दिया है। इससे दवा की खेप जारी करने की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और संबंधित दस्तावेजों की जांच करना आसान हो सकेगा।

इस व्यवस्था से दवा निर्माण कंपनियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंत्रालय ने मांगे सुझाव और आपत्तियां

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों पर संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक पक्ष अपने विचार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव (औषधि विनियमन) को भेज सकते हैं।

फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद ही इसकी वास्तविक लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

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