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UNESCO Memory of the World Register: महाभारत, अर्थशास्त्र और राजतरंगिणी को मिली वैश्विक पहचान, भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

नई दिल्ली, भारत। भारत की प्राचीन साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। महाभारत, आचार्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र और 12वीं शताब्दी में लिखी गई कल्हण की राजतरंगिणी की पांडुलिपियों को यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर’ में शामिल किया गया है। इसे भारतीय सभ्यता, ज्ञान और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इन तीनों ग्रंथों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने से भारत की प्राचीन बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। इन रचनाओं में धर्म, राजनीति, शासन व्यवस्था, दर्शन और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों का वर्णन मिलता है।

तीन प्राचीन ग्रंथों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

महाभारत भारतीय साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में शामिल है। इसमें धर्म, कर्तव्य, न्याय और जीवन के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

वहीं आचार्य कौटिल्य का अर्थशास्त्र राजनीति, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथ है। दूसरी ओर, कल्हण की राजतरंगिणी कश्मीर के इतिहास का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत मानी जाती है। इसमें वहां के राजाओं और राजनीतिक घटनाओं का विवरण मिलता है।

भारत की छह प्रविष्टियां हुईं

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के संस्कृति विभाग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यूनेस्को के प्रमाणपत्रों की तस्वीरें साझा करते हुए इस उपलब्धि की जानकारी दी। इसके साथ ही बताया गया कि इन तीनों ग्रंथों के शामिल होने के बाद मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियों की संख्या छह हो गई है।

इस उपलब्धि में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन पांडुलिपियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से भारतीय ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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