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AI Skills 2030: भविष्य की नौकरियों के लिए स्नातकों को AI और मानवीय कौशल से लैस करने की तैयारी

नई दिल्ली, दिल्ली। आने वाले वर्षों में रोजगार का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा और नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वर्ष 2030 में नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं के सामने नई चुनौतियां होंगी। ऐसे में विश्वविद्यालयों के लिए जरूरी हो गया है कि वे विद्यार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि मानवीय कौशल के साथ भी तैयार करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य के कार्यक्षेत्र में तकनीकी जानकारी के साथ संवाद, रचनात्मकता, सहयोग, सहानुभूति और समस्या समाधान की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। बदलती परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और नई चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालने वाले युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

2030 तक बदल जाएंगे कई जरूरी कौशल

विश्व आर्थिक मंच की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2030 तक कर्मचारियों के मौजूदा मूल कौशल का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा बदलने की संभावना है। रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा की बढ़ती मांग के साथ विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता और लचीलेपन को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव पर जोर

AI के कारण शुरुआती स्तर के कई पारंपरिक कार्यों का स्वरूप बदल रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने के अवसर देने होंगे। इससे उनमें निर्णय लेने, गलतियों से सीखने और व्यावसायिक आत्मविश्वास विकसित करने में मदद मिलेगी।

हर विषय के विद्यार्थियों के लिए जरूरी होगी AI

यूनिवर्सिटीज UK ने फ्यूचर जॉब्स रोडमैप जारी किया है, जिसमें विद्यार्थियों को व्यावसायिक अनुभव, AI उपकरणों तक पहुंच, नियोक्ताओं की भागीदारी और करियर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब केवल तकनीकी विषयों तक सीमित नहीं रहेगी। कला, प्रबंधन, वाणिज्य और अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी इसका व्यावहारिक और नैतिक इस्तेमाल सीखना होगा। भविष्य में वही स्नातक बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे, जो तकनीकी समझ के साथ मानवीय क्षमताओं का संतुलित उपयोग करना जानते होंगे।

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