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सोनिया गांधी ने बाबरी ढांचा ध्वंस को याद कर किया बड़ा खुलासा, बोलीं- मैं रो पड़ी थी; भाजपा ने कांग्रेस को घेरा

नई दिल्ली, दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्ष 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचे के ध्वंस को लेकर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जब विवादित ढांचे को गिराया गया था, तब वह रो पड़ी थीं। सोनिया गांधी के इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं।

 

सोनिया गांधी ने ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ को दिए एक साक्षात्कार में 1992 की घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि बाबरी ढांचे के ध्वंस के बाद उन्हें यह समझ आ गया था कि भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ेगा। उनके मुताबिक, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की कल्पना की थी, उसे सुरक्षित रखना जरूरी है।

सोनिया गांधी का यह साक्षात्कार उनके संस्मरण ‘बिलांगिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ के विमोचन से पहले सामने आया है। उनकी पुस्तक 10 नवंबर को जारी की जानी है। इस पुस्तक में उनके जीवन और राजनीतिक अनुभवों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भाजपा ने बयान पर जताई कड़ी आपत्ति

सोनिया गांधी के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि इस टिप्पणी से पता चलता है कि कांग्रेस और सोनिया गांधी के दिल में बाबर पहले भी था और आज भी है। भाजपा ने इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक और वैचारिक सोच से जोड़कर निशाना साधा है।

आपातकाल को भी बताया गलती

साक्षात्कार के दौरान सोनिया गांधी ने आपातकाल के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आपातकाल लागू किए जाने को गलती माना। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस फैसले को लेकर असहज थीं।

गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने की घटना भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल है। इस घटना के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस हुई थी।

अब सोनिया गांधी के ताजा बयान ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक घटना और कांग्रेस-भाजपा के बीच वैचारिक मतभेदों को चर्चा में ला दिया है।

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