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सड़क निर्माण में मनरेगा से खिलवाड़, मौन हैं जिम्मेदार

 

पंचायत में दो-दो सचिव एक को प्रभार तो दूसरे को फोकट का प्रभार,काम मे चल रहा लालफीताशाही

मनरेगा को “एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जिसके लिए प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्यों 100 दिन के दिहाड़ी के हिसाब से 100 दिनों का रोजगर मुहैया कराना अनिवार्य माना गया था।इसके तहत सड़कों, नहरों, तालाबों, कुओं का निर्माण करें आवेदक के निवास के 5 किमी के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना है, और न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करना है। यदि आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर काम नहीं किया गया है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता के हकदार हैं। इस तरह मनरेगा के तहत रोजगार एक कानूनी हकदार है जिसके लिए न सिर्फ कानून बनाया गया है अपितु संविधान में इसे एक अनुच्छेद के तहत भी रखा गया है पर सरकार के नौकरशाहों के लिए यह कानून अब धन पिपासु बन चुका है जहाँ फर्जी मस्टर की बिसात पर किसी को भी रोजगार दिलाने का नायाब तरीका इस्तेमाल किया जाता है।

शहडोल।।सरईकापा

विनय मिश्रा….

ग्राम पंचायत सरईकापा में इन दिनों यही खेल खेला जा रहा है जहाँ सड़क निर्माण कार्य मे बाहर से लाए गए व्यक्ति द्वारा ठेकेदारी कराया जा रहा है तो वहीं ठेकेदार के मजदूरों का फर्जी मस्टर भी भरा जा रहा है जबकि नियमतः यह हक सर्वप्रथम गांव के ही अकुशल श्रमिक का है जिसे रोजगार देकर उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके।
ग्राम पंचायत सरईकापा में माध्यमिक विद्यालय से लेकर तालाब (हनुमान मंदिर वर्तमान) तक सीसी रोड निर्माण कराया जा रहा है जिसमे गुणवत्ता के चीथड़े तो उड़ ही रहे हैं साँथ में सड़क की तराई भी रोजाना नही होता निर्माण कार्य अपने गंतव्य स्थल तक पहुचने को है किंतु अभी तक सड़क निर्माण का कार्य योजना पटल लापता है जिससे कार्य का विवरण अपने आप ही प्रकट हो रहा है यानी ठेकेदार के हिसाब से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और शासकीय राशि का उपयोग और उपभोग दोनों किया जा रहा है।

बादशाह का जलवा बरकरार….

बुढार स्थित बादशाह हार्डवेयर के बिल पंचायतों में खंगालने पर आभास हो जाएगा कि बादशाह हार्डवेयर में सीमेंट,छड़ के अलावा क्या क्या बिक रहा है बुढार से सटे कुछ चिन्हित पंचायत हैं जहाँ बादशाह के बिलों की बादशाहत आज तक बरकरार है अगर इन बिलों की आयकर विभाग द्वारा जाँच की जाए या पिछले 10 वर्षों का आडिट हो तो “दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा”।

इनका कहना है…
फोन लगाने पर नम्बर बन्द आ रहा था,सीईओ ममता तिवारी सोहागपुर जनपद

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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