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रेत खदानो में सरकार के मुनाफे पर रोड़ा बने स्थानीय नुमाइंदे

 

खदान सरेंडर करवाने की मंशा और जद्दोजहद

रोज रची जा रही नई-नई कूट नीतियाँ

अनूपपुर।।

रेत खदानों को लेकर सरकार व ठेकेदारों के बीच अभी भी कशमकश जारी है आलम ये है कि कम्पनी द्वारा करोड़ो रूपये का टेंडर व लीगल ठेका लेने के बाद भी न ही स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग मिल रहा है न सरकार अपने हो रहे राजस्व मुनाफे को लेकर चिंतित हैं।कम्पनी अगर ठेका छोड़ती है तो पुनः उन स्थानीय माफियाओं का कद बढ़ जाएगा और पुनः वह माफिया सक्रिय हो जाएँगे जो बारह मासी नदी से अवैध व चोरी की रेत निकासी करते हैं।
कोतमा तहसील अंर्तगत यह दूसरी मरतबा है जब कम्पनी के कुछ कर्मचारियों पर स्थानीय थाना द्वारा कार्यवाही की गई है सवाल यह है कि लीगल ठेका लेकर कम्पनी कार्य कर रही है उसके बाद भी कम्पनी स्थानीय प्रशासन पर आश्रित है और स्थानीय स्वार्थी तत्वों जिनका अब रेत निकासी में जुगाड़ नही बन रहा है के द्वारा कम्पनी के खिलाफ शिकवा शिकायत जारी है इस पूरे मसले पर स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि रेत के इस व्यवसाय से सरकार के मुनाफे में इजाफा हो और आम आदमी को आसानी से रेत मिल सके।

ये रहा पुराना इतिहास…

अनूपपुर ज़िले की कोतमा तहसील में कई दिनों से रेत के व्यवसाय को लेकर जंग जारी है कम्पनी के कार्य को प्रभावित करने के लिए कुछ न कुछ पैंतरे अपनाए जा रहे हैं। सूत्रों की और जनचर्चाओ की मानें तो कथित व्यक्ति पूरे रेत के कारोबार को कंट्रोल करने का जिम्मा शुरू से ही था और उक्त व्यक्ति द्वार पूर्व रेत ठेकेदार के जी डेवलपर्स को ब्लैकमेल करके कोतमा की खदान का संचालन अपने हाथ में ले लिया था । खदान का संचालन खुद के जिम्मे लेने के बाद योजनाबद्ध तरीके से छोटे गाड़ी मालिकों को खत्म कर दिया गया और तहसील की सभी साइटों पर रेत की आपूर्ति एवं बिक्री में मोनोपॉली बना ली गई

रेत किंग के कैसे-कैसे पैतरे

यह पूरा कोतमा क्षेत्र जानता है कथित रेत का व्यापारी रेत में इस कदर पैर पसारा है कोई भी बाहर की ठेका लेकर आने वाली कम्पनी इसके जद में रहता है।खुद का जुगाड़ न बनने और स्थापित साम्राज्य को बचाने के जुगत में कथित रेत माफिया आये दिन ठेकेदार की शिकायत करना और करवाना शुरू कर दिया ।सरकार द्वारा नीयत रेत दरों को जनता तक आसानी से पहुँचाने का जिम्मा जिन कम्पनियों को है ऐसे मंसूबो पर कथित व्यक्ति पानी फेरता नजर आ रहा है।यही नही उक्त व्यक्ति सरकारी अधिकारियों पे आक्षेप लगाना शुरू कर दिया । ठेकेदार के कर्मचारियों को रास्ता रोकना व उनके साँथ अभद्रता करवाना भी अब ऐसे व्यक्तियों के लिए आम हो चुका है।
जल्द ही ऐसे विषयो पर अगर प्रशासन सख्त नही हुआ तो वो दिन दूर नही जब कम्पनी रेत के इस कारोबार को सरकार को सरेंडर कर देगी और माफिया व चोरों की एक फौज पुनः रेत निकासी में अपना सिक्का दौड़ाएंगे

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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