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जिले में एक ही जगह पर वर्षों से डेरा जमाये हुये अधिकारी कर्मचारी ही भ्रष्टाचार की धुरी – शैलेन्द्र श्रीवास्तव

जिले में एक ही जगह पर वर्षों से डेरा जमाये हुये अधिकारी कर्मचारी ही भ्रष्टाचार की धुरी – शैलेन्द्र श्रीवास्तव

 

???? अधिकारी और नेता मस्त जनता त्रस्त
???? ना किसी में बोलने का साहस, ना ही अब कोई सुनने वाला
???? हर अधिकारी कर्मचारी की सीधे मंत्री मिनिस्टर तक पहुँच
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शहडोल।।

तहसील कार्यालय से लेकर ज़िले के पुलिस थानों तक में अंगद की तरह पैर जमाये हुए अधिकारी कर्मचारी अब भ्रष्टाचार की धुरी बन चुके हैं l तहसील कार्यालयों में तो बाक़ायदा हर छोटे बड़े काम के रेट पहले से तय है l ग़नीमत बस इतनी मानिये कि अब तक ये रेट लिस्ट कहीं चस्पा नहीं की गई है, तहसील कार्यालयों में वर्षों से डेरा जमाये हुए बाबू ख़ुद में चलती फिरती रेट लिस्ट हैं l रेट तय करने से लेकर वसूलने तक की ज़िम्मेदारी इन्ही बाबूओं के मजबूत कंधों पर है l मामूली से दिखने वाले ये बाबू करोड़ों के आसामी हैं l पर पता नहीं इन्हें किसका संरक्षण है जो ना इन्हें ED, EOW जैसी किसी जाँच एजेंसी की चिंता है ना ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की l इन्ही बाबूओं जैसा ही कुछ हाल वर्षों से एक ही हल्के में जमे हुये पटवारियों का भी है l पर इन सब मुद्दों से ना तो जनप्रतिनिधियों का कोई लेना देना है ना ही नेताओं का, सब कुछ मानो इस तर्ज पर चल रहा है कि अपना काम बनता तो भाड़ में जाये जनता l

लगभग यही हाल ज़िले भर के पुलिस थानों का है जहां वर्षों से कुछ थाना प्रभारी अपनी कुर्सियों पर इस प्रकार चिपके हुये हैं कि जैसे ये कह रहे हों कि फेविकोल का मज़बूत जोड़ है टूटेगा नहीं l

कुछ समय पहले ही ज़िले में आये नये पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली को देखकर ठगी जा चुकी जनता को एक उम्मीद की किरण नज़र आई, पर वो भी अब धुंधली सी होने लगी है l सब कुछ पहले जैसे ही बदस्तूर जारी है l

ज़िले में राजनीतिक शून्यता कोई नई बात नहीं है, जनप्रतिनिधियों से लेकर नेता तक सब केवल अपनी जेब भरने में मस्त हैं l राजनीति को सेवा का माध्यम बताने वाले राजनीति में मेवा खाने में इस कदर मस्त हैं कि जनता अब सबसे त्रस्त है l

पर जनता की परवाह करने वाला कोई नहीं है, हो भी कैसे सबको पता है कि चुनाव के ठीक पहले फिर कोई लाड़ली बहना या लाड़ला जीजा जैसी कोई नई योजना आ जाएगी और भूलने की बीमारी से ग्रसित प्रदेश की जनता फिर से सब कुछ भूलकर सत्ता की जय जयकार में व्यस्त हो जाएगी l

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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