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क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि पर्व??

क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि पर्व??

धर्म…डेस्क

महाशिवरात्रि भोलेनाथ की पूजा प्रदोष काल में 4 प्रहर की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन देश भर के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों समेत शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रहती है।अब आपको महाशिवरात्रि के बारे में तो पता चल गया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर्व क्यों मनाया जाता है?

 

 

जानिए क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि…

आपको बता दें कि महाशिवरात्रि मनाने का यह त्योहार भगवान शिव को समर्पित है।इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का एक विशेष अवसर है।
पौराणिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवजी ने वैराग्य का त्याग कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया और माता पार्वती से विवाह किया। इसी कारण, हर वर्ष शिव-गौरी के विवाह उत्सव के रूप में महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।
महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर नगर के चारो ओर उत्साह है बाजे-गाजे के साँथ भगवान शिव की प्रतिमा व मंदिरों में पूजा-अर्चना किया जाता है साँथ ही प्रसाद वितरण के रूप में भण्डारे का आयोजन भी किया गया है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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