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कारगिल युद्ध मे गँवाया दोनों पैर..एक हाँथ… एक हाँथ पर उठाया तिरंगा…कौन हैं नायक दीपचन्द

कारगिल युद्ध मे गँवाया दोनों पैर..एक हाँथ… एक हाँथ पर उठाया तिरंगा…
जानिए इस महान योद्धा को “एक शाम शहीदों के नाम स्पेशल”
बुढ़ार।।

जब-जब आजाद भारत की बात हो और जहन में आजादी की जिक्र न हो, ऐसा तो शायद मुनासिब नही,करीब 1857 से लेकर 1947 (90वर्ष ) बाद छिड़ी जंग ने आजादी के इस भूँख को तृप्त किया था। आजादी के इस महासंग्राम में भारत के इस धरा पर कई महान सपूत पैदा हुए कितनो ने अपने खून से इस धरा को सींचा, पर बात जब 23 मार्च की हो तो भारत के पहले वीर सपूत भगत सिंह के बलिदान और उनका त्याग मन के अंदर क्रांति के तरंग पैदा कर देती है। आजादी के बाद भी भारत और पाकिस्तान का द्वंद्व जारी रहा। बीच-बीच मे बनते बिगड़ते रिश्ते 1999 में हुए कारगिल युद्ध ने पुनः जख्म को हरा कर दिया ।
हम क्रिकेट मैदान से लेकर जंग के मैदान में आज भी पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मानते हैं।
भारत के लिए 26 जुलाई, 1999 की तारीख बेहद खास है। यही वो तारीख है जब भारतीय सेना के वीर जवानों ने टाइगर हिल, प्वाइंट 4875, प्वाइंट 5140 समेत सभी पहाड़ी चोटियों को पाकिस्तानी सेना के कब्जे से आजाद करा कर कारगिल युद्ध जीत लिया था।

इस युद्ध मे कई जवान भारतमाता की गोद मे सो गए तो कुछ ने जीवन को संघर्ष से जीत लिया। ऐसे ही भारत के एक महान सपूत हैं जिन्होंने युद्ध के दरमियान अपने दोनों पैर और एक हाँथ गवांकर भी युद्ध मे अपनी बहादुरी को कायम रखा और आखिरकार जीत के नायक साबित हुए।

एक शाम शहीदों के नाम “नायक दीपचन्द” करेंगे इस शाम को रौशन…

हर वर्ष की भाँति इस बार भी कोयलांचल बुढ़ार में “मेरा रंग दे बसंती चोला” जैसे देशभक्ति गानों से कोयलांचल की संध्या गमगीन होगी।
जहाँ शामिल होंगे ऐसे शख्स जिन्होंने अपनी बहादुरी से दुश्मनों के दाँत खट्टे कर दिए और कारगिल युद्ध में अपनी बहादुरी और दृढ़ता से दुश्मनों का सामना किया, युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए 15,000 से ज़्यादा गोलियाँ चलाई नायक दीपचंद प्रख्यात ने मिसाइल रेजीमेंट में हिस्सा लिया था। बहुत बहादुरी से उन्होंने दुश्मन के गोला-बारूद को नष्ट किया।
उनकी यूनिट ने कारगिल युद्ध मे 8 गन पोजीशन को बदला और लगभग 10,000 गोले दुश्मन पर दागे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें दर्जनों पुरुस्कार प्राप्त हुए किन्तु जो प्यार और स्नेह उन्हें भारत के लोगों ने दिया उसके आगे सारे मैडल फीके पड़ जाते हैं। नायक दीपचन्द कहते हैं की जब भी जीवन मिले इसी धरती पर यानि अखण्ड भारत भूमि पर ही मिले।

आइए हम सब मिलकर कोयलांचल की इस धरा में भारत के इस वीर सपूत को सुनें और उनका उत्साहवर्धन करें।

लांस_नायक_दीपचंद :-

जिनके दोनों पैर और एक हांथ भारत मां के चरणों में बलिदान हो गए, उसके बाद भी अपने जज्बे को मातृभूमि के लिए जीवित रखे हुए हैं..

याद रखिए शहीदों को श्रद्धांजली का दिवस :

शहीद दिवस 23 मार्च दिन रविवार,शाम 6 बजे कालेज तिराहा बुढार-धनपुरी

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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