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“मैं अटल हूँ”दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए

 

 

डेस्क…देश-दुनिया

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?….ये पंक्‍त‍ियां क‍िसी में भी जोश भरने के ल‍िए काफी है। इनके रचय‍िता पूर्व प्रधानमंत्री व ओजस्‍वी कव‍ि स्व.अटल बिहारी वाजपेयी हैं।
पेशे से पत्रकार और शौक से कवि और राजनीत‍ि के ‘युग पुरुष’ के रूप में पहचाने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपना राजनैतिक जीवन शुरू किया था। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री बनें। उनका यह सफर इतना आसान नहीं रहा।
यह रास्ता तय करने में उनके जीवन में कईं मोड़ आए। इस मंजिल तक पहुंचने में और इसके बाद कुछ ऐसे फैसले रहे जिन्होंने उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिलाया।

जन्म व शिक्षा-दीक्षा…

25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और श्रीमती कृष्णा देवी के घर जन्मे श्री अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज वर्तमान में लक्ष्मीबाई कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीतिशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की। शिक्षा के दौरान कई साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां उनके नाम रहीं। उन्होंने राष्ट्रधर्म (मासिक पत्रिका), पाञ्चजन्य (हिंदी साप्ताहिक) के अलावा दैनिक अखबारों जैसे स्वदेश और वीर अर्जुन का संपादन किया। इसके अलावा भी उनकी बहुत सी किताबें प्रकाशित हुईं जिनमें मेरी संसदीय यात्रा-चार भाग में, मेरी इक्यावन कविताएं, संकल्प काल, शक्ति से शांति, फोर डीकेड्स इन पार्लियामेंट 1957-95 (स्पीचेज इन थ्री वॉल्यूम), मृत्यु या हत्याध, अमर बलिदान, कैदी कविराज की कुंडलियां (इमरजेंसी के दौरान जेल में लिखी गई कविताओं का संकलन), न्यू डाइमेंसंस ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी आदि प्रमुख हैं।
श्री वाजपेयी ने बहुत सी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। वे 1961 से राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य रहे हैं।

प्यार को प्यार ही रहने दो…

बीबीसी एक रिपोर्ट में प्रकाशित आर्टिकल के अनुसार ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज वर्तमान में महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज पढ़ाई के दौरान श्री वाजपेयी की मुलाक़ात राजकुमारी हक्सर से हुई जिनकी तरफ़ वो खिंचे चले गए। श्री वाजपेयी की जीवनी की लेखिका मशहूर पत्रकार सागरिका घोष बताती हैं, “उस ज़माने में दोनों का व्यक्तित्व प्रभावित करने वाला हुआ करता था। राजकुमारी हक्सर बहुत सुंदर थीं, ख़ासतौर से उनकी आंखें, उन दिनों बहुत कम लड़कियां कॉलेज में पढ़ा करती थीं वाजपेयी उनकी तरफ़ आकर्षित हो गए. राजकुमारी भी उन्हें पसंद करने लगीं.”
वो बताती हैं, “पहले उनकी दोस्ती राजकुमारी के भाई चांद हक्सर से हुई. लेकिन जब शादी की बात आई तो राजकुमारी के परिवार ने शिंदे की छावनी में रहने वाले और आरएसएस की शाखा में रोज़ जाने वाले वाजपेयी को अपनी बेटी के लायक नहीं समझा. राजकुमारी हक्सर की शादी दिल्ली के रामजस कॉलेज में दर्शन शास्त्र पढ़ाने वाले ब्रज नारायण कौल से कर दी गई.”और इस तरह उनका यह प्रेम अधूरा ही रह गया।

राजनीतिक सफर…

वाजपेयी जी के पास चार दशक से अधिक समय का संसदीय अनुभव था। वे 1957 से संसद सदस्य रहे हैं। वे 5वीं, 6वीं, 7वीं लोकसभा और फिर उसके बाद 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में चुनाव जीतकर पहुंचे। इसके अलावा 1962 और 1986 में दो बार वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। वर्ष 2004 में वे पांचवी बार लगातार लखनऊ से चुनाव जीतकर लोक सभा पहुंचे।
श्री वाजपेयी जी इकलौते नेता थे जिन्हें चार अलग-अलग राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने का गौरव हासिल है। एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल इतना गौरवशाली रहा कि एक दशक के बाद भी उस कार्यकाल को न सिर्फ याद किया जाता है, बल्कि उस पर अमल भी किया जाता है। इसमें पोखरण परमाणु परीक्षण, आर्थिक नीतियों में दूरदर्शिता आदि शामिल हैं। आधारभूत संरचना के विकास की बड़ी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग और स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाएं भी इनमें शामिल हैं। बहुत ही कम ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने समाज पर इतना सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।

उपलब्धियाँ…

उन्होंने अलग-अलग समय मे अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन किया है…

●1965-70 अध्यक्ष, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एंड असिस्टेंट स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन
●1968-84पंडित दीनदयाल ●1969 उपाध्याय स्मारक समिति ,दीनदयाल धाम, फराह, मथुरा, उत्तर प्रदेश जन्मभूमि स्मारक समिति,
●श्री वाजपेयी 1951 में जनसंघ के संस्थायपक सदस्य और फिर 1968-1973 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और 1955-1977 तक जनसंघ संसदीय पार्टी के नेता रहे।
●वह 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में और 1980 से 1986 तक भाजपा के अध्यक्ष रहे। साथ ही 1980-1984, 1986, 1993-1996 में वे भाजपा संसदीय दल के नेता रहे।
● ग्यारहवीं लोक सभा के दौरान वह नेता विपक्ष के पद पर रहे। ●इससे पहले मोरार जी देसाई की सरकार में उन्होंने 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक विदेश मंत्री का पदभार भी संभाला।
●श्री वाजपेयी के 1998-99 के प्रधानमंत्री के कार्यकाल को ”दृढ़निश्चकय के एक साल” के रूप में जाना जाता है। इसी दौरान 1998 के मई महीने में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया था जिन्होंने परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
●फरवरी 1999 में पाकिस्तान बस यात्रा ने उपमहाद्वीप की परेशानियों को सुलझाने के लिए एक नए दौर का सूत्रपात किया। इसे पूरे दुनियाभर में प्रशंसा मिली। इस मामले में भारत की ईमानदार कोशिश ने वैश्विक समुदाय में अच्छा प्रभाव छोड़ा। बाद में जब मित्रता का यह रूप धोखे के रूप में कारगिल के के रूप में सामने आया तब श्री वाजपेयी जी ने विषम परिस्थितियों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया और घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने में सफलता हासिल की।

●श्री वाजपेयी जी को राष्ट्र के प्रति उनके सेवाओं के मद्देनजर वर्ष 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें लोकमान्य तिलक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य आदि पुरस्कार से नवाजा गया। इससे पहले 1993 में कानपुर विश्वदविद्यालय ने मानद डॉक्ट्रेट की उपाधि से नवाजा था।
●वर्ष 2014 में उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की गयी और मार्च 2015 में उन्हें भारत रत्न से प्रदान किया गया। उन्हें 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की उपाधि से अलंकृत किया गया।

दहेज में पाकिस्तान चाहिए…

साल 1999 की बात है जब श्री वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते रखने का प्रयास कर रहे थे उन दिनों एक महिला पत्रकार के इस प्रस्ताव पर अटल जी ने जवाब में पाकिस्तान माँग लिया और वहां मौजूद लोग सुनकर ठहाके लगाने लगे। दरअस्लअटल जी ने महिला पत्रकार के शादी के प्रस्ताव को सुनकर कहा कि फिर हमें दहेज में पाकिस्तान चाहिए।
ये वाकया साल 1999 का है। जब देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। उन दिनों उन्होंने पाकिस्तान से रिश्तों को बेहतर करने के लिए बस चलवाई थी। खुद अटल बिहारी वाजपेयी इस बस से पाकिस्तान गए थे। इसी दौरे के दौरान उन्होंने पाकिस्तान में मीडिया से बात की थी। उस वक्त ही पाकिस्तान की महिला पत्रकार ने मुंह दिखाई में कश्मीर मांग लिया था, जिसके बदले अटल जी ने दहेज में पूरा पाकिस्तान देने की मांग रख दी। पूरा हाल ठहाके लगाने लगा, श्री वाजपेयी का ये अंदाज पूरे विश्व मे चर्चा का विषय रहा।

मृत्यु….

16 अगस्त 2018 को, भारत के 10वें प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 93 वर्ष की आयु में एम्स में अंतिम साँस ली । 17 अगस्त 2018 को उनका राजकीय अंतिम संस्कार किया गया। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में हुआ।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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