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“जिंदगी और कुछ भी नही..तेरी-मेरी कहानी है.नही रहे एक्टर मनोज कुमार.

 

डेस्क.. बॉलीवुड

कुछ पाकर खोना है… कुछ खोकर पाना है… जीवन का मतलब तो आना और जाना है…जिंदगी और कुछ भी नही तेरी मेरी कहानी है..शोर फिल्म पर संतोष आनंद की स्क्रिप्ट पर बना यह गाना आज भी लोगों के हसंते मन को उदास कर देती है और जहन में जीवन के प्रति कई सवाल पैदा करती है यानि जीवन यहीं तक है इसके बाद संसार मिथ्या है।
1960-70-80 के दशक में फिल्मों और इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले मशहूर एक्टर भारत कुमार उर्फ मनोज कुमार किसी नाम के मोहताज नही है उनकी फिल्में सदैव समाज व देश समर्पण के लिए रहा यही नही “जय जवान जय किसान” का नारा देने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें अपने इस नारे के लिए फिल्म बनाने के लिए कह दिया था मनोज कुमार ने शास्त्री जी पर उपकार जैसी फिल्म बनाई फिल्म पर बनाया गया गाना “मेरे देश की धरती आज के 20वीं सदी में भी मन को रोमांचित कर देती है.फिल्म सिनेमा के पर्दे पर खूब चला पर अफसोस फिल्म को देखने के लिए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जीवित नही रहे।

ऐसा रहा इनका फिल्मी सफर…

नौ अक्टूबर 1956 को फ़िल्मों में हीरो बनने का सपना लिए 19 साल का एक नौजवान दिल्ली से मुंबई आया. साल 1957 में अपनी पहली फ़िल्म फ़ैशन में 19 साल के इस युवक को 80-90 साल के भिखारी का छोटा सा रोल मिलता है.
इस नौजवान का नाम था हरिकिशन गोस्वामी था, जो बाद में मनोज कुमार के नाम से मशहूर हुए.
आख़िरकर साल 1961 में मनोज कुमार को बतौर हीरो ब्रेक मिला फ़िल्म ‘कांच की गुड़िया’ से.
इसके अगले ही साल विजय भट्ट की फ़िल्म ‘हरियाली और रास्ता’ ने मनोज कुमार की ज़िंदगी का रास्ता ही बदल दिया.

जब क्रांति ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए…

उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्में बनाने वाले मनोज कुमार ने साल 1981 में बनाई थी सबसे बड़ी पीरियड एक्शन ड्रामा फिल्म. जिसका नाम है ‘क्रांति’. जब ये फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर भी सुनामी आ गई थी और ये उस साल की बल्कि 1980 दशक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म भी बन गई थी.
क्रांति’ बनाना मनोज कुमार के लिए जरा भी आसान नहीं था. शत्रुघ्न सिन्हा, दिलीप कुमार, मनोज कुमार, हेमा मालिनी से लेकर प्रेम चोपड़ा और परवीन बाबी से सजी फिल्म 19वीं शताब्दी की ‘क्रांति’ पर आधारित थी. जो इंडियन सिनेमा की सबसे मंहगी फिल्मों में से एक थी.
ऐसे में मनोज कुमार ने ‘क्रांति’ के लिए दिल्ली में अपने बंगले को बेच दिया. मुंबई में भी जमीन को बेचना पड़ गया. मगर जब फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो मनोज कुमार की मेहनत और सभी प्रयास सफल हुए. इसे ब्लॉकबस्टर का तमगा मिला और ये 400 दिन तक थिएटर में चलती रही. 26 केंद्रों पर तो इसकी सिल्वर जुबली और कुछ जगह गोल्डन जुबली सेलिब्रेट की गई.
जब शोले रिलीज हुई थी तो इसने 15 करोड़ की कमाई की थी. मगर ‘क्रांति’ वर्ल्डवाइड 20 करोड़ की कमाई पार कर चुकी थी. हालांकि रमेश सिप्पी ने दोबारा शोले को रिलीज किया तो ये मनोज कुमार की फिल्म से आगे निकल गई थी.

उपकार फिल्म बनाया प्रधानमंत्री के लिए …

मनोज कुमार की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक ‘उपकार’ (1967) का जन्म एक खास मुलाकात से हुआ था। 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनकी फिल्म ‘शहीद’ देखी। भगत सिंह के जीवन पर बनी इस फिल्म से प्रभावित होकर शास्त्री जी ने मनोज से अपने लोकप्रिय नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर एक फिल्म बनाने को कहा। मनोज ने इस सुझाव को दिल से लिया और ट्रेन में दिल्ली से मुंबई लौटते वक्त ही ‘उपकार’ की कहानी लिख डाली। यह फिल्म न सिर्फ सुपरहिट रही, बल्कि इसके गाने ‘मेरे देश की धरती’ ने देशभक्ति की भावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

जब इंदिरा ने छुआ था भगत सिंह की माँ के पैर….

शुरू में भगत सिंह पर फिल्म बनाने के लिए मनोज कुमार इंटरेस्टेड नही थे पर बाद में उन्होंने तय किया
इस फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म और राष्ट्रीय एकता के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. इस समारोह के लिए मनोज कुमार ने भगत सिंह की माँ को भी बुलाया था.
जब अभिनेता डेविड ने मंच से नेश्नल अवॉर्ड की घोषणा की तो भगत सिंह की माँ विद्यावती को बुलाया गया और पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा था.
मनोज कुमार ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि कैसे इंदिरा गांधी ने आकर भगत सिंह की माँ के पैर छूए थे.

अमिताभ को मुंबई से जाने से रोंका…

एक दौर ऐसा था जब अमिताभ बच्चन की फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं और उनका करियर डूब रहा था। 1970 के दशक में जब अमिताभ बच्चन लगातार असफलताओं से हताश होकर मुंबई छोड़कर दिल्ली लौटने का मन बना चुके थे, तब मनोज कुमार ने उन्हें रोका। मनोज ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि लोग अमिताभ को ताने मार रहे थे, लेकिन उन्हें यकीन था कि यह लंबा-चौड़ा नौजवान एक दिन बड़ा सितारा बनेगा। उन्होंने अपनी फिल्म ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ (1974) में अमिताभ को मौका दिया। यह फिल्म हिट रही और अमिताभ के करियर को नई दिशा मिली। मनोज की यह दूरदर्शिता बाद में सच साबित हुई जब अमिताभ ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में बॉलीवुड के शिखर पर पहुंचे।

अंतिम साँस…
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के सिल्वर जुबली व चॉकलेटी हीरो मनोज कुमार अब इस दुनिया मे नही रहे. मनोज कुमार ने 87 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। दिग्गज एक्टर के निधन से इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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