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तो ऐसे होता है बाल मजदूरों का शोषण

 

 

जिले में खुलेआम माखौल उड़ रहा बाल संरक्षण अधिकार का हर जगह नियोजित हैं बाल श्रम

बाल मजदूरी कराने वाले को 2 साल तक जेल की सजा का प्रावधान

बाल श्रम से संबंधित शिकायत पुलिस 100, चाइल्ड लाइन 1098 पर

जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक सम्पन्न
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शहडोल ।।
भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद-23,24 ब्लातश्रम व बलुआ मजदूरी जैसे कार्यो के लिए निषेध हैं अर्थात 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी कार्य या श्रम में नियोजित करना न सिर्फ मानव अधिकारों का हनन है बल्कि यह कानूनन अपराध है हलाकि इस नियोजन में प्रथम दृष्टया उन बच्चों के अभिभावकों की भी अपने बच्चों के प्रति जवाबदेही है किंतु श्रम में नियोजित बच्चो के मा-बाप नही हैं तो कोई होकर भी विवश हैं और पेट पालने या घर चलाने की स्थिति में कारखानों या श्रम नियोजन में लग जाते हैं।
आलम यह है कि जिले के सभी संस्थानो का भौतिक निरीक्षण किया जाए तो विरले ही ऐसे सन्स्थान होंगे जहाँ 14 वर्ष से कम बालक नियोजित न हों।

होटल,रेस्टोरेंट, दुकानों,या अन्य संस्थानो में खंगाले जाएँ बाल संरक्षण व उनके अधिकार…

शहडोल जिले में होटल,रेस्टोरेंट, चाय की दुकान,पान की दुकान,कारखानें,ऑटो मोटर गैरेज,ईंट भट्ठों, जैसे सैकड़ो ऐसे सन्स्थान हैं जहाँ बाल संरक्षण का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है किंतु समय-समय पर ऐसे कानूनों की समीक्षा तो की जाती है पर जमीनी स्तर पर उनका पहल नही होता कई बार तो इन संस्थानो में नियोजित बालकों के साँथ आकस्मिक दुर्घटना या मृत्यु तक हो जाती है और सन्स्थान द्वारा थोड़ा बहुत भरपाई करके मामले को दबा दिया जाता है और इस स्थिति में बाल अधिकारों का हनन ही नही बल्कि हत्या हो जाती है।

बाल श्रम निषेध पर हुई समीक्षा…

अपर कलेक्टर सरोधन सिंह की उपस्थिति में सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में बाल और किशोर श्रम प्रतिषेद एवं विनियमन संशोधित अधिनियम 2016 के तहत जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक में आयोजित की गई। अपर कलेक्टर ने कहा कि 14 साल से कम उम्र का बच्चा मजदूर के रूप में काम नहीं कर सकता, बाल मजदूरी करवाने वाले व्यक्ति को 2 साल तक जेल की सजा हो सकती है, बाल मजदूरी करने वाले को 20 हजार रूपये से लेकर 50 हजार रूपये तक का जुर्माना भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाल श्रम से संबंधित शिकायत कोई भी नागरिक पुलिस 100, चाइल्ड लाइन 1098 पेंसिल पोर्टल पर कर सकते हैं।

 

 

इन धाराओं के तहत दर्ज होगा अपराध

उक्त बैठक में जिला नोडल अधिकारी बाल श्रम चरणा गुप्ता ने बताया कि बाल श्रमिक को नियोजित करने पर अधि० की धारा 14 (1) के तहत तथा किशोर श्रमिक को खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में नियोजित करने पर अधि० धारा 14 (1क) के तहत कम से कम छः माह की अवधि का कारावास, लेकिन जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या इसके अलावा कम से कम 20 हजार रूपये का जुर्माना है, लेकिन जिसे 50 हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकता है अथवा ये दोनों दण्ड का प्रावधान है। उपर्युक्त धाराओं के आधीन अपराध को दोहराने पर कम से कम एक वर्ष की अवधि का कारावास, लेकिन जिसे 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने पीड़ित बाल किषोर श्रमिक की सुरक्षा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि छुड़ाए गए बच्चे की मूलभूत आवश्यकताएं छुड़ाए जाने के तत्काल बाद अवश्य पूरी की जानी चाहिए, बाल कल्याण समिति रू छुड़ाए गए बच्चों को 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करना अनिवार्य है, जो जांच का आदेश देगी, जिसमें चिकित्सा जांच, आयु का निर्धारण, मध्यस्थ देखभाल और सुरक्षा, माता पिता का पता लगाना एवं श्रमिक के घर का सत्यापन किया जाना शामिल किया जा सकता है, सामजिक जांच की रिपोर्ट 15 दिन के अंदर दाखिल की जायेगी।इस स्तर पर या जांच की समाप्ति पर बाल कल्याण समिति किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से एफआईआर में अतिरिक्त धारायें शामिल करने की सिफारिश कर सकती है।

ये रहे उपस्थित…

उक्त बैठक में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अरविंद शाह,जिला बाल संरक्षण अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग मनोज लारोकर, जिला समन्वयक सर्व शिक्षा अमरनाथ सिंह, संजीव वर्मा सहित जिला टास्क फोर्स समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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