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गाली अब गाली नहीं रही, लोगों ने प्रचलित भाषा बना दी- पवन केशरी

lगाली अब गाली नहीं रही, लोगों ने प्रचलित भाषा बना दी- पवन केशरी

शहडोल।।

नित्यानंद जी की पंक्तियां हैं- तुम्हे खूबसूरत नजर आ रही हैं, ये राहें तबाही के घर जा रहीं हैं। आज के समय में सबसे बड़ा खतरा गाली ना खाने का है। आपने उसे प्रचलित भाषा बना लिया है। गीत में कोई “दिअर्शी” शब्द होने पर लता जी जैसे महान गायिका उस गीत को गाने से इंकार कर देती थी। हम अपने पिता जी के सामने “चालू” जैसे शब्द भी इस्तमाल करने से डरते हैं। पर आज के जमाने में संकोच खत्म हो चुका है। गाली हर समाज मे दी जाती है, परंतु मंच मां शारदा का पीठ है वहां गली देना अनुचित है। इस संदर्भ में अक्सर सुविख्यात कवि, एक्टर एवं लेखक आदरणीय सैलेश लोढ़ा जी दो पंक्तियां कहते हैं- भाषाएं निर्धन हुई, गाली हुई अमीर समय समय की बात है, सोच रहे कबीर।

*हिंदी को देशभर में अनिवार्य करने पर कई विवाद हुए, इसमें आपकी क्या राय है?*
दुनियां की हर भाषा अपने आप में बेहद समृद्ध सामर्थ और शक्तिशाली है, कोई भी भाषा दूसरे भाषा के अस्तित्व को समाप्त नहीं कर सकती। इसलिए मेरे अनुसार इस तरह के विवाद ही निरर्थक हैं। किसी भी भाषा की आपस में तुलना करना ठीक नहीं।

*आपके लिए दोस्ती और प्यार के क्या मायने हैं?*
दोस्त एक जज्बाती रिश्ता है, और दोस्त कहना एक बड़ी जिम्मेदारी। दोस्त साथ में उठने-बैठने वाला नहीं बल्कि खड़े रहने वाला होता है। आपके दोस्त को यह अहेशाश होना चाहिए की कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों न हो उसके साथ कोई खड़ा है। वहीं प्रेम बताने की चीज नहीं बल्कि भावना है। उसके बारे में बात नही उसे महसूस करना चाहिए। हमारे पिता जी के पीढ़ियों में धैर्य और सामाजिक बंधनों के प्रति सम्मान था, यही बात है की हमारे रिश्तों की बुनियाद जिंदिगी के तमाम उतार-चढ़ाव में भी नहीं हिलती। वहीं सभी को स्पेस देना भी जरूरी है। जब दो समान लोग मिलते हैं तभी जोड़ी बनती है इसलिए अपने आप को साथी से बेहतर नहीं बराबर मानकर चलेंगे तभी रिश्ता बरकरार रहेगा।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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