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सीवर लाइन ने दफन किए दो जिंदा लाश..काश ये मौत भी “A”जेनेरेटड होता..?

सीवर लाइन ने दफन किए दो जिंदा लाश..काश ये मौत भी “A”जेनेरेटड होता..?
शहडोल।।
विनय मिश्रा की कलम से…

शहडोल जिले में इन दिनों भ्रष्टाचार अपने चरम पर है हर जगह व्याप्त भ्रष्टाचार के अग्रदूत नौकरशाहों से शुरू होकर सरकार तक जाकर खत्म हो जाती है।मामला स्कूल पेंट पुताई का हो,ड्रायफ्रूट्स का हो या फिर छात्रावास का हो,सबमे प्रशासन की अपनी अहम जिम्मेदारी व सहभागिता है।
बात सिर्फ भ्रष्टाचार की होती, तब भी ठीक था पर जब बात जान पर आ जाए और लापरवाहों पे जाँच तक न खड़ी हो ऐसे में अब सवाल भी किया जाए तो किससे.?
गुजरात की एक निजी कम्पनी की भेंट दो मजदूर चढ़ गए इस भारी बारिश में जब एक गरीब अपने सिर के नीचे छत तलाशता है वहाँ ये दो गरीब पेट के लिए भारी बारिश में बिना किसी उपकरण और सुरक्षा के मिट्टी खोद रहे थे ताकि शाम की रोटी मुनासिब हो। घटना की जिम्मेवारी किसकी है और इसकी जवाबदेही तय कौन करेगा ये या तो लोकतंत्र चलाने वाले लोग तय करेंगे या लोकतंत्र के पर्दे में काम करने वाले नौकरशाह।
इस मौत का जनाजा भले ही उठ जाए पर इंसाफ मिलते-मिलते उन गरीब परिवारों का जीवन गुजर जाएगा और लालफीताशाही के दौर में उस आवाज को दफ्तर की किसी कोने में दबा दिया जाएगा।

 

काश! ये मौत भी उन भ्रष्टाचार और घोटालों की तरह “AI” जेनरेटेड हो जाता ताकि सफाई और स्पष्टता का संदेह भी खत्म हो जाता । काश ये दो मजदूर भी “AI” जेनरेटेड होते या रोबोट के इस दौर में रोबोटिक मशीन जो मशीनरी उपकरणो के साँथ मशीन तंत्र बनकर गड्ढे खोद रहे होते।

अब तो शर्म जैसे शब्दों का प्रयोग करना भी शर्म है,हिंदी में प्रसिद्ध व्यंग्यकार ‘हरिशंकर परसाई’ जी ने लिखा है जब “शर्म की बात गर्व की बात बन जाए, तब समझो कि जनतंत्र बढिय़ा चल रहा है”।

फिलहाल पूरा माजरा क्या है इसे जानें

शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर-1 में कल गुरुवार को एक दर्दनाक घटना घटी जब सीवर लाइन की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से दो मजदूर मिट्टी में दब गए, करीब 15 घण्टे रेस्क्यू के बाद दोनों मजदूरों के शव बाहर निकाले।
जानकारी के अनुसार, गुजरात की एक निजी कंपनी द्वारा शहर में आज एक वर्ष से ज्यादा समय से सीवर लाइन डालने का कार्य किया जा रहा था। पाइप लाइन बिछाने के लिए खुदाई चल रही थी, तभी अचानक मिट्टी धंस गई और दो मजदूर 40 वर्षीय मुकेश बैगा और 33 वर्षीय महिपाल बैगा दोनों निवासी कोटमा के रहने वाले उसकी गड्ढे में दब गए। घटना के तुरंत बाद लगभग 5 घण्टे रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति को मृत अवस्था में बाहर निकाला गया। वहीं दूसरे मजदूर की तलाश के लिए रेस्क्यू जारी रहा और लगभग 15 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार सुबह पोकलेन मशीन से खुदाई कर उसका शव भी मलबे से निकाला गया।
गुजरात की इस कंपनी ने न तो मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखा, न ही खुदाई के दौरान कोई सेफ्टी बैरियर या सपोर्ट सिस्टम लगाया गया, जिससे यह हादसा हुआ। घटना के तुरंत बाद पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं। दोनों मजदूर अपने-अपने घर के लिए दिहाड़ी कमाने वाले थे जिससे परिवार चलता था उनकी मौत के बाद सिर से छत तो गया ही परिवार का मुँह से निवाला भी चला गया..अब भी इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा और इन दो मौतों का जिम्मेदार कौन है..?

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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