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यहाँ विधायक पति का रौब…बौने पड़े अफसर

तालाब सौंदर्यीकरण पर विधायक पति की दखल

विधायक निधि से चल रहा मनमानी काम

न एस्टीमेट न लागत बेहिसाब काम
शहडोल।।गोहपारू

शहडोल जिले के गोहपारू जनपद अन्तर्गत जल गंगा सम्वर्धन की ऐसी बयार बह रही है कि उसमें सभी जिम्मेदार डुबकी लगा रहे हैं यानी जिसका जहाँ मन पड़ा वहाँ उतना जुगाड़, कुछ काम कुछ बिना काम,का आहरण जारी है।अभी जल गंगा सम्वर्धन का मामला गोहपारू जनपद अन्तर्गत तूल पकड़ा ही था कि एक एक नए जल स्रोत का मामला सामने आ गया जहाँ चुहिरी ग्राम पंचायत बस स्टैंड में रामसागर तालाब का गहरीकरण किया जा रहा है जिसमे मशीनरी उपकरणों का प्रयोग कर कार्य प्रगति पर है।ताज्जुब कक बात है कि विधायक पति का ऐसा भौकाल है कि पंचायत सिवाय प्रस्ताव देने के काम की ओर झाँकने तक कि जहमत नही उठा पा रहा है और भरे बरसात में तालाब का गहरीकरण मानक मापदंडों से परे चल रहा है।

न सूचना पटल न लागत का पता,पंचायत तमाशबीन

ग्राम पंचायत अन्तर्गत होने वाले किसी भी काम की जवाबदेही सर्वप्रथम ग्राम पंचायत की है यही नही इसके लिए आज नही बल्कि 1990 के दशक में बनने वाले पंचायतीराज व्यवस्था और अब के दौर में पेशा जैसे कानून का निर्माण किया गया है किंतु कानून बनाने वाले सरकार के जिम्मेदार ओहदे पर बैठे लोग अपने ही सरकार की किरकिरी करने पर आमादा हैं।
मुख्यमार्ग में चल रहे रामसागर तालाब के गहरीकरण में पंचायत के जिम्मेदार से लेकर सम्बंधित जिम्मेदार को काम की लागत और आहरण भुगतान का पता नही है यही नही सचिव ने स्वीकार किया कि मेरे हिस्से सिर्फ प्रस्ताव आया है और मैं सिर्फ प्रस्ताव पास करके विधायक पति को दिया हूँ अब वह किस हिसाब से काम करा रहे हैं वही बता पाएंगे।

मनरेगा जैसे प्रभावी कानून शिथिल

वैसे मेढ़ बंधान से लेकर पंचायत के तमाम कच्चे और पक्के कार्यो में मनरेगा कानून प्रभावी है किंतु ग्राम पंचायत चुहिरी में यह कानून शिथिल और निष्क्रिय सा प्रतीत हो रहा है तालाब गहरीकरण का सम्पूर्ण कार्य मशीनरी उपकरणों के बलबूते हो रहा है जिसमें मनरेगा पार्ट कितना है यह पता लग पाना मुश्किल है यही नही चल रहे कार्य का सूचना पटल भी नही है जिससे यह तय किया जा सके कि मनरेगा और मशीनरी दोनों का कितना रोल है इसके बाद मनरेगा जैसे कानूनों की धज्जियाँ स्वयं सरकार के अंग उड़ा रहे हैं नौकरशाहों की क्या बिसात..?

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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