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बारिश का कहर और विद्यालयों का टपकता छत…मप्र सरकार ने जारी किया आदेश

बारिश का कहर,और विद्यालयों का टपकता छत…मप्र सरकार ने जारी किया आदेश

शहडोल…विनय मिश्रा की कलम से

राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से सात बच्चों की मौत और कई के घायल होने के बाद इस हादसे ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है सवाल है कि शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी चीजों पर सरकार कब पहले करेगी।आप कभी मप्र के खस्ताहाल स्कूलों और सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की रिपोर्ट खंगाले सरकार और शिक्षा प्रणाली की हालात खुद ब खुद बयाँ हो जाएँगी।हाल में ही जिले के ब्यौहारी शिक्षा परिसर में हुए 4 किलो पेंट और रंगों की पुताई पर लगे सैकड़ा भर मजदूरों ने भ्रष्टाचार को मात दे दिया और भ्रष्टाचार को भी शर्म आ गया।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था इस कदर बदद्दतर है कि राजस्थान में स्कूल के नीचे मृत हुए बच्चों के शवों ने सरकार के विकास और विकास की झूँठी बातों के तमाम दावे खोखले नजर आए,जहाँ मृत बच्चों को जलाने के लिए लकड़ियाँ भी नसीब नही हो रही थी प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी बीबीसी की मानें तो शवों को जलाने के लिए साइकिल व मोटरसाइकिल के टायरों के प्रबंध किए गए हलाकि प्रशासन ने इस पर खंडन करके कहा कि लकड़ियों का प्रबंध किया गया था।
न्यूज एजेंसियों की मानें तो स्कूल हादसे में घायल ग्यारह बच्चे अभी भी ज़िला मुख्यालय के एसआरजी अस्पताल में भर्ती हैं. मृतकों और घायलों में ज़्यादातर बच्चे भील आदिवासी और दलित परिवारों से हैं।

मप्र में शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लोक शिक्षण संस्थान ने आदेश जारी किया है कि प्रदेश में वर्तमान में विभिन्न जिलों में अतिवृष्टि की स्थिति है। ऐसी स्थिति में यदि विद्यालय भवनों की छत में सीपेज / लीकेज की स्थिति है, ऐसे भवनों के अनुरक्षण प्राथमिकता पर कराये जाने के निर्देश पूर्व में लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र कमांक/भवन/अ/9545/03/2025/35 दिनांक 24.04.2025 द्वारा विस्तृत रूप से दिये जा चुके है एवं आवश्यक आवंटन भी जारी किया जा चुका है।

आपको पुनः निर्देशित किया जाता है कि ऐसे शासकीय प्राथमिक/ माध्यमिक/हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल जहाँ किसी प्रकार की लीकेज या सीपेज अथवा सीलिंग का प्लास्टर गिरने की संभावना है वहाँ कक्षाएँ किसी भी दशा में संचालित न की जायें, साथ ही समस्त प्राचार्यों / प्रधानाध्यापक को निर्देशित करे कि वह प्रत्येक कक्ष का सतत निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार उपलब्ध आवंटन या स्थानीय मद से भी तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करें।
आपको बता दें शहडोल जिले के ऐसे दर्जनों स्कूल हैं जहाँ प्राथमिक विद्यालयों में या तो छात्रों के पास बैठक व्यवस्था नही है या कहीं दरखते छत के नीचे छात्र अपने भविष्य को सवारने जाते हैं।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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