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काँग्रेस जिलाध्यक्ष कौन..?

क्या अबकी बार कोयलांचल..

कोयलांचल से दो दावेदार

अगला जिलाध्यक्ष कौन..?

शहडोल।।

तकरीबन दो दशक से सत्ता से बाहर रहने के बाद काँग्रेस रसातल में जा रही थी किंतु राहुल गाँधी का केंद्र में नेता प्रतिपक्ष बनते ही बुझे हुए काँग्रेस में एक बार फिर जान आ गई चुनावों के दौरान अपनी-अपनी लॉबिंग करने वाले नेताओं की वजह से कांग्रेस अलग-अलग गुटों में विभक्त हो गई ऐसे में केंद्र स्तर से हाई कमान का आदेश है, कि जिसमे अटूट नेतृत्व क्षमता होगी और जो सभी को संगठित करके चल सके वही इस बार जिलाध्यक्ष का पद सम्हालेगा। जिलाध्यक्ष की इस कड़ी में हाई कमान ने विधानसभा और निकाय-चुनाव में अच्छा प्रदर्शन को भी पैमाने में रखा है यानी नेतृत्व का पैमाना स्थानीय स्तर का चुनाव भी है।

जिला मुख्यालय में लाबिंग..

जिला मुख्यालय में कॉंग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए अलग-अलग नामों की पैमाइश चल रही है किंतु इन सभी नामों के अपने-अपने गुट हैं और एक व्यक्ति दूसरे गुट में प्रवेश नही करता यानी काँग्रेस के यूथ स्तर से लेकर जिला स्तर के सम्मेलनों या आयोजनों में अपने अपने खेमे या चहेते ही रहते हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष से शुरू हुई लाबिंग और गुटबाजी ने मुख्यालय में ऐसी हवा दी कि वर्तमान में काँग्रेस के दामन में लगे दाग से पीछा नही छूट रहा है यूथ कांग्रेस की दौड़ सोहागपुर से शुरू होकर जयस्तम्भ चौक में खत्म हो जाती है वहीं काँग्रेस के वर्तमान जिलाध्यक्ष और भावी जिलाध्यक्ष की रेस में गिने जाने वाले कथित व्यवसायी की दौड़ लकड़ी टाल तक सीमित है।जिला मुख्यालय में कुछ चिन्हित चेहरों के इर्दगिर्द जिलाध्यक्ष का पद सिमटते हुए नजर आ रहा है विधानसभा और लोकसभा में मिली करारी हार ने इन चेहरों के नेतृत्व की कलई खोल दी फिर भी पार्टी इन्ही चेहरों को तरजीह देती है तो आगामी दिनों में वही परिणाम सामने आएं इससे इंकार नही जा सकता।

क्या इस बार कोयलांचल..

ये कोयलांचल का दुर्भाग्य है कि की पुश्तों से काँग्रेस समर्पित नाम और चेहरे होने के बाद कोयलांचल में जिलाध्यक्ष का ताज किसी को नही मिला आफ रिकार्ड बात करें तो कोयलांचल में कुछ ही चिन्हित चेहरे कांग्रेस के कट्टर समर्पित हैं जिन्हें यह पद देने में संगठन को मजबूती प्रदान तो होगी सांथ ही जिला व स्थनीय स्तर के चुनावों के परिणाम भी काँग्रेस के लिए सुखद होंगे।फिलहाल बाँकियो की बात छोड़ दें तो कोयलांचल से दो नामों पर जोर शोर से चर्चा है कांग्रेस जिला कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में पदस्थ बलमीत सिंह खनूजा और प्रदीप सिंह हलाकि प्रदीप सिंह काँग्रेस समर्पित हैं इसमें कोई दो राय नही किंतु जहाँ विपक्ष की मौजूदगी गिनाना हो वहाँ प्रदीप सिंह की अनुपस्थिति को भी नकारा नही जा सकता या फिर यूँ कहें कि उनका भी एक खेमा कांग्रेस का झंडा उठाए रहता है।
जिलाध्यक्ष पद के लिए बलमीत सिंह खनूजा पे गौर फरमाएँ तो कोयलांचल में अग्रिम पंक्ति पर उनका नाम है यदि बलमीत को जिलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा जाता है तो कांग्रेस के भीतर नया जोश और मैदान में नई सक्रियता देखने को मिलेगी। श्री खनूजा वर्षों से कांग्रेस विचारधारा के मजबूत सिपाही रहे हैं और आंदोलन हो या सामाजिक सरोकार, हमेशा अग्रिम पंक्ति में नजर आए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अब तेज है कि अब जिलों में काँग्रेस का पदाधिकारी कौन होगा और जिलाध्यक्ष की ताजपोशी किसके सिर होगा। प्रदेश नेतृत्व का अगला फैसला न सिर्फ जिले में कांग्रेस की दिशा तय करेगा, बल्कि जिला स्तर में काँग्रेस की राजनीतिक पकड़ के साँथ साँथ आमजनमानस में भी एक अच्छा मैसेज जाएगा।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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