दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

कांग्रेस जिलाध्यक्ष जो नही बन पाए….!

 

…विनय मिश्रा की कलम से

जिन दरख्ते दीवारों पर मैंने आशियाना बनाने को सोंचा दरअसल बाद मैं समझ आया कि उन दरखते दीवारों को गढ़ने वाला एक इंसान ही तो है”।
इन मुशायरों को फरमाते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने को लेकर काफी मंथन किया मंथन के बाद जब सियासत के इस समुद्र से हलाहल निकला तो अचंभित रह गया। काश!पार्टी उन लोगों को भी याद कर लेती जो पुश्तों से कांग्रेस का झंडा लिए बैठे हैं और पार्टी की जीत में अपनी जीत और हार में अपनी हार समझते हैं।कांग्रेस प्रमुख राहुल गाँधी व प्रदेश नेतृत्व सम्हालने वाले जीतू पटवारी ने कांग्रेस के 71 जिलाध्यक्षों का चयन किया है उम्मीद है जिनका चयन हुआ है वह सीमित न होकर असीमित रहेंगे और पार्टी को रसातल से आसमान तक ले जाएँगे । काँग्रेस प्रमुख राहुल गाँधी ने कुछ महीने पहले कहा था कि इस बार जिलाध्यक्ष, विधानसभा से लेकर लोकसभा और लोकसभा से लेकर निकाय चुनावों के परिणाम को देखते हुए तय किए जाएँगे और यूथ फायर ब्रिगेड इस कड़ी में प्रथम पंक्ति में रहेंगे राहुल गांधी के इस बात में किंतनी सच्चाई है यह तो हम नही कह सकते किंतु शहडोल जिलाध्यक्ष चयन के बाद वरिष्ठ व सक्रिय कार्यकर्ताओ के मन में अंदर ही अंदर जो कशमशी है वह विरहा मन मे ही लोट रही है।अब तो सिवाय प्रभु के आलाप करने के अलावा कुछ नही हो सकता।आध्यात्मिक जीवन मे जाकर सोंचिए कैसे “मीरा श्रीकृष्ण के लिए विरहा की हूँक में जलती रही अंत तक मीरा की आँखों के पानी सूख गए पर श्रीकृष्ण न मिले, और उनकी राह को आँखों मे समेटे हुए देह त्याग दी“। इन पंक्तियों का अर्थ है कि सियासी स्वर्ग की सीढ़ियों में पार्टी का झण्डा उठाने वाले और निष्ठा से काम करने वाले योग्य और निपुण व्यक्ति कोसों दूर रह जाते हैं किन्तु उन्हें स्वर्ग के दरवाजे प्राप्त नही होते और अन्तोगत्वा उनका हाल भी मीरा की तरह ही होता है यानी कि जीवन भर सिवाय तपस्या के कुछ हासिल न हो सका , जीवन भर तपस्या के बाद मिला पार्टी का झुनझुना।
बिना किसी पक्षपात के एक बार कोयलांचल नगरी पर आ जाते हैं पहले भी इस विषय पर लिख चुके हैं कि यह कोयलांचल का दुर्भाग्य है कि यहाँ कुशल व कर्मठ सियासतदान होने के बाद भी इन्हें स्वीकार नही किया गया यानी ये कहें कि आर्थिक नगरी से सिवाय अकूत चंदाखोरी के कुछ नही किया जाता।बात जब सत्ता में ताजपोशी की हो तब वहाँ जोर,शोर सिफारिश और मुह दिखाई का रश्म शुरू हो जाता है। कोयलांचल की गलियों में इस बार जिलाध्यक्ष के नामों का शोर शराबा तो था पर वह सिर्फ गलियों की सन्नाटों में तब्दील हो गया गलियों को पटाखों और जश्नबाजी का इंतेजार तो था पर वो भी लोकसभा चुनाव के परिणाम जैसा निकला “यानी भाग न जाए लबधे शून्य”।
खैर तब तक अकेले बैठ कर साहिर लुधियानवी का लिखा ये गीत मोहम्मद रफी की आवाज में गाते रहिए…
“हम इंतज़ार करेंगे …
कयामत तक
“खुदा करे कि कयामत हो, और तू आए…
हम इंतज़ार करेंगे …
न देंगे हम तुझे इलज़ाम बेवफ़ाई का।
मगर गिला तो करेंगे तेरी जुदाई का।
“खुदा करे के कयामत हो, और तू आए”
हम इंतज़ार करेंगे …

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!