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जरवाही बटली घाट में अवैध रेत उत्खनन: सत्ता–सिस्टम की मिलीभगत या प्रशासन की नाकामी?

जरवाही बटली घाट में अवैध रेत उत्खनन: सत्ता–सिस्टम की मिलीभगत या प्रशासन की नाकामी?

शहडोल..

 

शहडोल जिले में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन हब बन चुका है और विभाग के जिम्मेदार अब तक कार्यवाई के नतीजे तक नही पहुँचे। यही वो शहडोल जिला है जहाँ इस अवैध रेत उत्खनन ने माफियाओं द्वारा पुलिस और पटवारी तक को निशाना बना दिया किन्तु सिस्टम फिर उसी पुराने ढर्रे में चलने लगा जिले के हर ब्लाक और क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन खुलेआम चल र है किंतु प्रशासन किसी ठोस कदम तक नही पहुँच पाया।सूत्र बताते हैं कि इस अवैध रेत उत्खनन में स्थानीय थाने का खुला संरक्षण रहता है जिससे माफिया रातभर हथियार लेस होकर भयमुक्त रेत उत्खनन करते हैं।

 सोन उगल रहा सुनहरी रेत..

सूत्रों और जानकारों की मानें तो सहकार ग्लोबल कम्पनी द्वारा 48 करोड़ का ठेका लिए जाने के बाद भी वैध रेत और वैध खदान संचालित नही हो पा रहा है जिसके चलते स्थानीय माफिया स्थानीय थाने को सेट करके रात भर सोन नदी का चीरहरण कर रहे हैं।
आपको बता दें छाँटा, चंगेरा, पाड़खेर,मरजाद ,जरवाही बटली घाट इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का हॉटस्पॉट बन चुका है। हालात इतने भयावह हैं कि नदी में बने पुल और पानी के स्थिर पानी मे घुसकर इस काम को न सिर्फ अंजाम दिया जा रहा है बल्कि नदी के स्वरूप को भी बदलने की हिमाकत की जा रही है। लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं खुली। रात होते ही घाट पर भारी वाहनों की लाइन लग जाती है और सुबह होते-होते रेत के टीलों की जगह गहरी खाइयाँ दिखने लगती हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रुपए के दम पर यह पूरा खेल बखूबी चल रहा है। खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद माफिया बेखौफ घूम रहे हैं। सवाल यह है कि जब हर रोज सैकड़ों वाहन खुलेआम नदी की रेत ढो रहे हैं, तो क्या प्रशासन को यह दिखाई नहीं देता? या फिर कहीं न कहीं सत्ता–सिस्टम की गुप्त सांठगांठ इस अवैध कारोबार को खुला संरक्षण दे रही है?

यदा-कदा स्थानीय समाज सेवी और पत्रकारों द्वारा विभाग और स्थानीय थाने को सूचना तो दी जाती है किंतु न विभाग के कानों में जू रेंगता न थाने के जिम्मेदारों की नींद खुलती।सिर्फ कागजी खानापूर्ति हुई है।
जरवाही बटली घाट पर चल रहा यह अवैध उत्खनन अब जिले के लिए चेतावनी की घंटी है। यदि त्वरित और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घाट एक दिन पूरी तरह खत्म हो जाएगा, और साथ ही खत्म हो जाएगी प्रशासन की विश्वसनीयता भी।
सूत्रों की मानें तो बीते दिनों इसी घाट में छत्रपाल नामक आदिवासी युवक के साँथ माफियाओं द्वारा मारपीट की गई और मामला स्थानीय बुढ़ार थाने तक भी पहुँचा किन्तु माफियाओं के मैनेजमेंट के आगे छत्रपाल जैसे गरीब थाने की आस ही छोड़ देते हैं।

इनका कहना है…

किंतने बजे गाड़ी लगती है कौन लगाता है बताइए कार्यवाई करवाते हैं.. अमृता गर्ग एसडीएम सोहागपुर

आप जीपीएस लोकेशन भेजिए मैं कार्यवाई करवाता हूँ, जसपाल मीणा रेंजर जैतपुर

मैं कल 12 बजे रात बटली घाट गया था गाड़ी नही मिली मिलेगी तो कार्यवाई होगी..विनय सिंह गहरवार थाना बुढ़ार

 

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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