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बसों में लगी आग से मौत का खतरा, MP में भी सुरक्षा में बड़ी चूक

AC Sleeper Bus

देश में बसों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है, खासकर AC स्लीपर बसों के निर्माण को लेकर। हाल ही में कई हादसों में यात्रियों की जलकर मौत हुई है। जांच में सामने आया है कि इन बसों को दिहाड़ी मजदूर बना रहे हैं, जिनके पास उचित प्रशिक्षण नहीं है। न ही बसों में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल सर्टिफाइड हैं और न ही तकनीशियन का अनुभव पर्याप्त है।

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में हुई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। MP में भी वही चूक देखने को मिली है, जहां यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया। बस निर्माण कंपनियों ने लागत कम करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की जगह अनपढ़ और असुरक्षित दिहाड़ी मजदूरों को काम पर लगा रखा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि AC स्लीपर बसों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिकल फिटिंग, घटिया मटेरियल और प्रशिक्षित तकनीशियन का अभाव है। आग लगने की स्थिति में बचाव के लिए इमरजेंसी निकासी साधन भी नहीं होते। इसके अलावा कंपनियां सुरक्षा परीक्षण की प्रक्रिया को भी हल्के में ले रही हैं।

यात्री भी इन बसों की असुरक्षा से अनजान रहते हैं और उन्हें बसों की गुणवत्ता या प्रमाणपत्रों की जानकारी नहीं दी जाती। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवहन विभाग ने कहा कि वह तुरंत जांच शुरू करेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बस निर्माण में सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। प्रशिक्षित तकनीशियन, सर्टिफाइड मटेरियल और नियमित सुरक्षा जांच के बिना यात्रियों की जान जोखिम में रहती है। प्रशासन और बस कंपनियों को मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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