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VIT यूनिवर्सिटी में छात्रों से जबरन ब्लड और यूरिन सैंपल, विवादित नियमों पर सवाल

VIT University, Student Rights,

विधानसभा में हेमंत कटारे ने उठाया मुद्दा;

कंसेंट बॉन्ड के बिना सैंपल लिए जाते हैं,

बजरंगबली का नाम लेने पर जुर्माना

विधानसभा में हाल ही में उठाए गए एक मुद्दे ने VIT यूनिवर्सिटी में छात्रों के अधिकारों और नियमों पर बहस छेड़ दी है। विपक्ष के सदस्य हेमंत कटारे ने विधानसभा में कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों से बिना उनकी पूर्ण सहमति ब्लड और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इसके लिए छात्रों से जबरन कंसेंट बॉन्ड भी भरवाए जाते हैं, जो कानूनी दृष्टिकोण से गंभीर सवाल खड़े करता है।

कटारे ने बताया कि यह मामला केवल मेडिकल टेस्ट तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, अगर छात्र विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक प्रतीक जैसे “बजरंगबली” का नाम लेते हैं तो उन पर फाइन लगाया जाता है। यह कदम छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा के नाम पर यह अनिवार्य सैंपलिंग छात्रों में डर और असंतोष पैदा कर रही है। कई छात्र और अभिभावक इस बात से चिंतित हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों को अपने पक्ष में मनमाने तरीके से लागू कर रहा है। सैद्धांतिक तौर पर कंसेंट बॉन्ड छात्रों की सहमति पर आधारित होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि कई छात्र इसे बिना समझे और दबाव में भरते हैं।

विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि नियमों का पालन हुआ या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में छात्रों की निजता और अधिकारों की रक्षा अत्यंत जरूरी है। ऐसे कदम, जो छात्रों को भयभीत करें और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाएं, शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत हैं।

छात्र संघ और अभिभावक समूह ने भी इस मामले पर सरकार और विश्वविद्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित किए बिना किसी प्रकार का सैंपलिंग या जुर्माना लागू करना उचित नहीं है।

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