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जब तक है जान… खरीदेंगे धान!

संजय को रास आ गया धान का स्वाद…
सरकारी में कब्जा और समूह में भी

अब जय बजरंग बली के नाम से जुगाड़

शहडोल।।

—जैतपुर लैम्प्स के बिरौड़ी केंद्र की यही नई परंपरा बन गई है। स्थानीय किसानों के बीच चर्चा है अभय और संजय को धान का ऐसा स्वाद रास आया है कि खरीद केंद्र मानो उसका निजी खलिहान बन गया हो। हालात ये है कि सरकारी भी हमारी… समूह भी हमारा, की कहावत यहां एकदम सटीक बैठती दिख रही है। केंद्र पर खरीदी की प्रक्रिया जब सरकारी होती है तब भी इनका दखल और जब समूह का हो तब भी इन्ही का जुगाड़। इनके अपने रहते हुए केंद्रों में जिस तरह संचालन में भर्रेशाही रहता है।

सूत्र बताते हैं कि संजय और अभय ऐसे घाघ हैं कि जैतपुर और बिरौड़ी केंद्र में सुबह से लाइन में लगने वाले वास्तविक किसान इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि कुछ चुनिंदा और दलाल लोगों के ट्रैक्टर सीधे अंदर दाख़िल हो जाते हैं। किसान आरोप लगाते हैं कि संजय एंड कंपनी ने खरीदी केंद्र को अपनी निजी जागीर बना रखा है। कौन-सा किसान पहले तोलेगा, कौन-सा शाम तक रुकेगा और किसका नंबर अगले दिन लगेगा सब कुछ बंद कमरों में होने वाली फुसफुसाहटों से तय होता है पारदर्शिता के नाम से संजय और अभय की अपनी मर्जी और सेटिंग चलती है।

जैतपुर लैम्प्स अन्तर्गत बिरौड़ी प्रबंधन पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार खरीदी केंद्रों में प्राथमिकता वास्तविक किसानों को दी जानी चाहिए, लेकिन यहां खेल उल्टा है। जानकारों की मानें तो किसान के शिकायत करने पर उन्हें “कल आना… अभी मशीन बंद है” जैसा जवाब देकर चलता कर दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ ‘खास लोगों’ की तौल पूरी रफ़्तार से जारी रहती है इसी तरह के खेल में संजय माहिर हैं इसलिए आज तक संजय केंद्र में अपना कब्जा जमाए हुआ है।
धान खरीदी केंद्र में इस अव्यवस्था का असर सीधे किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसके बावजूद प्रशासन और लैम्प्स प्रभारी आंखें मूंदे बैठे हुए हैं।
बिरौड़ी केंद्र की गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच हो, तौल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और संजय जैसे ‘धान प्रेमियों’ पर के गुणवत्ता और उनके धांधली को मापा जाए तो संजय की अपनी बेईमानी और धान खरीदी की रुचि का आभास हो जाएगा।

व्यवस्था के लिए काट दिया सरई के पेड़

1 दिसम्बर से धान खरीदने की सरकारी प्रकिया शुरू हो चुकी है जिससे केंद्रों में पानी,टेंट व बैरियर की व्यवस्था होने लगी है इस व्यवस्था की कड़ी में बिरौड़ी धान खरीदी केंद्र में व्यवस्था बन रहा है किंतु व्यवस्था की इस दिशा में जंगल के हरे-भरे सरई के पेड़ काटे जा रहे हैं हलाकि इस प्रकिया में पेड़ काटने-छाँटने के लिए वन विभाग की अनुमति ली गई है या नही इस बात को स्पष्ट नही किया जा सकता किन्तु इटना तय है कि सरई पेड़ या किसी भी प्रकार का हरा-भरा पेड़ काटने के लिए पहले वन विभाग की अनुमति आवश्यक है किंतु इस प्रकिया में सरई के पेड़ के ठूठे तो काटे जा रहे हैं पर विभाग की अनुमति नही।
धान खरीदी केंद्र में आजतक संजय जैसे लोगो का जमे रहना और लूट का मंजर तैयार किए रहना बताता है कि इस विभाग में चोरी किस तरह चोरों को पनाह दे रखा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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