दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

जैतपुर लैम्प्स में धान खरीदी की बागडोर फिर संजय–अभय के हाथ

 

किसान बोले—“गड़बड़ी के पुराने खिलाड़‍ियों को फिर मौका, अब लूट पक्की!”

संजय ने दिया परिवारवाद को हवा

जैतपुर लैम्प्स अन्तर्गत एक बार फिर धान खरीदी का दस्तक हो चुका है और पुराने शातिर ठगों ने कमान सम्हाल लिया है जैतपुर में अभय और बिरौड़ी में संजय की जोड़ी फिर एक बार धान के कालेपीले खेल में कालपीला करेंगे।
धान खरीदी शुरू होने से पहले ही जैतपुर लैम्प्स पर बवाल खड़ा हो गया है। संजय और अभय जैसे विवादित चेहरों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है, और किसान इसे साफ-साफ “गड़बड़ी का सीजन-ओपनर” बता रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि संजय तो पहले से ही समूह में जुगाड़ जमाकर बैठा है, हर साल विवाद, हर साल शिकायतें—लेकिन उसके रसूख के आगे सब बेअसर। वहीं अभय का भी रिकॉर्ड इतना चमकीला नहीं कि किसानों को भरोसा आए; पर फिर भी दोनों को जिम्मेदारी सौंप दी गई, जैसे किसानों की परेशानी कोई मुद्दा ही नहीं।

क्षेत्र में भ्रमण करते हुए किसानों से बात करने पर बताया ने तंज कसते हुए कहा कि
“जैतपुर लैम्प्स में अब ईमानदारों की नहीं, जुगाड़ वालों की चलती है। जिम्मेदारी नहीं बांटी गई, बल्कि ‘पुराने खिलाड़ियों’ को फिर से खेल का मैदान दे दिया गया है।”

लोगों का मानना है कि इस बार भी तौल में खेल, स्लिप में देरी और भुगतान में खींचतान तय है। किसान साफ कह रहे—“धान हमारा, मेहरबानी उनकी!”
अभय पर भी किसानों का भरोसा नहीं है। कई किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में उसके कार्यकाल के दौरान पारदर्शिता का अभाव देखा गया, और कई शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंची, पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। कुछ लोगों का कहना है कि“जिन लोगों के चलते हर बार विवाद होता है, उन्हीं को फिर कुर्सी दे दी गई। यह धान खरीदी है या जुगाड़ खरीद-फरोख्त?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि जैतपुर लैम्प्स में जिम्मेदारी बांटने का पैमाना योग्यता नहीं, बल्कि रसूख और सेटिंग हो गया है। यही कारण है कि किसानों को आशंका है कि इस बार भी खरीदी में पारदर्शिता नहीं रहेगी।
नियमतः हर केंद्र पर सीसीटीवी अनिवार्य, रोजाना निरीक्षण, तौल मशीन की जांच और हर किसान को निर्धारित समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो क्षेत्र के किसान आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!