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शहडोल में बेलगाम नशा, युवा पीढ़ी ले रहे इंजेक्शन और स्मैक

शहडोल में बेलगाम नशा, युवा पीढ़ी ले रहे इंजेक्शन और स्मैक
शहडोल।

विनय मिश्रा की रिपोर्ट..

नशे का अपना एक पैमाना है कुछ नशा सरकार बेंच रही है तो कुछ सरकार की नजर से परे हैं कोरेक्स जैसी कफ सिरप खाँसी के लिए बनी और फिर इसे बैन किया गया और इसी कफ सिरप से मप्र के छिंदवाड़ा में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी इस सिरप कांड ने पूरे सरकारी तंत्र की नींव हिला दी अकेले विंध्य प्रदेश में तकरीबन 80 फीसदी युवा इस नशे की चपेट में हैं पर कारोबार बंद नही हुआ बल्कि इसकी जड़ें धीरे-धीरे आसपास के गाँव-कस्बो और शहर में अपनी पैठ मजबूत कर रही हैं।
आपने देव आनंद और जीनत अमान की एक फिल्म देखी होगी फिल्म काफी चर्चित हुआ और सिनेमा के पर्दे पर इसे दर्शकों ने खूब सराहा फिल्म था “हरे रामा हरे कृष्णा”इस फिल्म का जिक्र इसलिए कर रहे हैं कि फिल्म में कैसे जीनत अमान चरसियों,हेरोइन और स्मैक जैसे नशेड़ियों की चपेट में आकर ताउम्र उस नशे की आदि हो जाती है और देव आनंद बहन जीनत को उस नशे की भीड़ में खोजते रहते हैं
खबर में थोड़ा फिल्मी स्क्रिप्ट इसलिए भी डाल दिए ताकि आप अपने परिवेश में ऐसे नशेड़ियों की पहचान कर सकें और नशा बेचने वाले उन कारोबारियों को बेनकाब कर सकें।
शहडोल जिले का कल्याणपुर क्षेत्र नशेड़ियों का गढ़ माना जाता है जिसे भेद पाना शायद पुलिस के लिए भी मुश्किल है इस कारोबार में सबसे ज्यादा यंग जेनेरेशन के लोग लिप्त हैं और उन्ही में ये नशा सबसे ज्यादा चलित है और इस मेडिकल नशे के बाद युवा पीढी बर्बाद तो हो रही है बल्कि इस बेलगाम नशे के बाद उनके हाँथ अपराध की ओर भी बढ़ रहे हैं।

अगर शहडोल पुलिस की फाइल खंगाली जाए तो अकेले अपराध के आधे से ज्यादा फीसदी के हिस्सेदार युवा पीढी हैं।
नशे के इस कारोबार और लत ने पुलिस व्यवस्था और खोखली होती युवा पीढी की पोल खोल दी जहाँ पुलिस कोतवाली से महज कुछ दूरी पर कल्यापुर में कुछ युवक अपने हाथ मे नशीली इंजेक्शन ले रहे थे जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ शहडोल जिले में मेडिकल नशा अब युवाओं के लिए कोढ़ बनता जा रहा है जिसकी जवाबदेही किसके सिर पर मढ़े यह कहना सवाल को मूर्ख बनाने जैसा है। युवाओं में बढ़ता मेडिकल नशे की लत न सिर्फ उनके स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि जिले के सामाजिक ताने-बाने और भविष्य के लिए भी गंभीर संकट बनती जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिले के शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना चिकित्सकीय पर्ची के नशीली दवाइयाँ आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। शुरुआत में सामान्य दवा के नाम पर इनका सेवन करने वाले कई युवा धीरे-धीरे इसकी लत में जकड़ चुके हैं। नशे की बढ़ती लत ने उनके शिक्षा स्तर को दूर किया ही है बल्कि रोजगार और पारिवारिक जीवन पर इसका प्रतिकूल असर साफ दिखाई देने लगा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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