दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

जब अपराध बेखौफ हों और व्यवस्था बेखबर

 

जिले में चारागाह बना कानून व्यवस्था

शहडोल।।

जिले में इन दिनों जो हो रहा है, वह केवल कुछ आपराधिक घटनाओं का सिलसिला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि कानून-व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है और अपराधी यह मानकर चल रहे हैं कि उन्हें रोकने वाला कोई नहीं।
तहसील कार्यालय में पदस्थ तहसीलदार को रेत माफिया ठोकर मार रहे हैं ,हॉस्टल से छात्रा गायब होकर लापता हैं, पुलिस अभिरक्षा से बंदी गायब हो जाता है, और जिला मुख्यालय जय स्तम्भ चौक में युवा आपस मे लड़ रहे हैं यह घटना सीधे-सीधे प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी और राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करती है।
शासकीय छात्रावास से छात्रा का लापता होना केवल एक गुमशुदगी नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी छात्रा का पता नही 8 जनवरी को गायब हुई छात्रा का पता नही, सवाल यह है कि क्या हमारी व्यवस्था तब ही जागेगी जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी?
पुलिस हिरासत से बंदी का फरार हो जाना कानून-व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। थानों की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो चुके हैं। वहीं शहर के हृदय स्थल जय स्तम्भ चौक पर सरेआम गुटों का टकराना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अपराधियों को अब पुलिस का डर नहीं रहा।
बलबहेरा में दो लोगों की निर्मम हत्या ने हालात को और भयावह बना दिया। यह दोहरा हत्याकांड केवल अपराध नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए एक चुनौती है।
जब इस तरह की घटनाएं रोजाना घटित होंगी तब तब आम जनता अपने आपको कैसे महफूज करेगा।
बड़ा सवाल है कि क्या कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल बयान जारी करने से निभाई जा सकती है जिले में घटती रोजाना की घटनांए मौन जनप्रतिनिधि और बेलगाम कानून व्यवस्था बताता है कि अराजकता की जड़ें अब इस जिले में गहरी हो चुकी हैं और कानून व्यवस्था नासूर।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!