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कहीं हिन्दू धर्म के ठेकेदार खुद ही तो नहीं कर रहे गौमांस का सेवन?

क्या हिन्दू धर्म के स्वयंभू ठेकेदार खुद ही निगलते रहे गौमांस!

शहडोल।बुढ़ार

बुढ़ार–सरई कापा क्षेत्र में सामने आया गौ तस्करी का भंडाफोड़ अब केवल अपराध की कहानी नहीं रह गया है, बल्कि यह धर्म, आस्था और पाखंड की आड़ में गौ माँस बेचने वाले और इन्हें खाने वाले उन स्वघोषित हिंदुओ के आस्था से भी जुड़ी है जो दिन के उजाले में गाय को माता कहते हैं और रात के अंधेरे में इनकी तस्करी और इन्हें खाने से भी परहेज नही करते। गौमाँस काटते और पकड़ाए जाने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि वह यह माँस स्थानीय बिरयानी सेंटरों में भी बेंचता है।
सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाला सवाल यह है कि जिन बिरयानी दुकानों पर वर्षों से भीड़ उमड़ती रही, जहां तथाकथित “कट्टर हिन्दू”, और “धर्म के प्रवर्तक” बड़े चाव से बिरयानी दबाते रहे—क्या उन्हें यह नहीं पता था कि उनकी थाली में परोसा जा रहा माँस ‘गौमाँस’ है। या फिर यह सब जानबूझकर किया गया सुविधाजनक पाखंड था?
गौमाता के नाम पर सड़कों पर शोर मचाने वाले, धर्म की रक्षा का ढोल पीटने वाले लोग अगर बिरयानी के नाम पर उसी गाय का गौमांस खाते आ रहे थे तो कहीं न कहीं यह आस्था से विश्वासघात नहीं बल्कि पूरे समाज को मूर्ख बनाने की साजिश है।
यह मामला अब सिर्फ गौ तस्करी का नहीं, बल्कि दोहरे चरित्र, नकली धार्मिकता और दिखावटी आस्था का आईना बन चुका है।

आपको बता दें कि भोपाल मुख्यालय में भी गौमाँस एक बड़ा रैकेट पकड़ाया था जिसमे 26-27टन गौमाँस होने के प्रमाण मिले थे बाद में इस माँस का लैब टेस्ट हुआ जिसमें रिपोर्ट में आया कि तकरीबन600 गाय कटी होंगी तब जाकर यह 26-27टन गौमाँस तैयार हुआ होगा।हैरानी की बात तो ये है कि इस माँस के निर्यातक में नगर निगम भोपाल का बकायदे सर्टिफिकेट जारी किया गया था। आप हैरान मत होइए एक बात और हैं कि मप्र में बीफ पर टैक्स नही है बल्कि दाल, चावल और दूध पर है फिर भी आप गर्व करें कि गाय हमारी माता है।
दिखावी ढकोसले की नही बल्कि जरूरत है सख्त कार्रवाई और सार्वजनिक जवाबदेही की, ताकि धर्म के नाम पर चल रहा यह गंदा खेल हमेशा के लिए बेनकाब हो सके।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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