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मुख्यमंत्री न आते तो क्या होता..?

मुख्यमंत्री न आते तो क्या होता..?

शहडोल ।
मप्र में हमारे सामान्य ज्ञान के हिसाब से तकरीबन 55 जिले हैं और इस 55 जिले के इकलौते मुख्यमंत्री मोहन यादव हैं उम्मीद हैं विकास के पर सभी जिलों में लग रहे होंगे सभी जिलों में कुछ न कुछ आकर्षक और रमणीय निर्माण कार्य हो रहे होंगे पर धनपुरी मप्र का इकलौता ऐसा शहर तो नही जहाँ स्वयं मुख्यमंत्री को आकर एक निर्माण कार्य का, स्वारी ऐतिहासिक निर्माण कार्य का इनागेरेशन करना पड़े।जिस नगरपालिका को धनाड्य नगरपालिका के नाम से जाना जाता है जहां कुबेर पैर तोड़कर बैठा है वहाँ मुख्यमंत्री जी को तो आना ही चाहिए।आधे घण्टे के इस कार्यक्रम में लाखों करोड़ों का हिसाब भला कौन पूछेगा,कारण जिस कार्यक्रम का लोकार्पण स्वयं सीएम करने आ रहे हों उस निर्माण कार्य और गड़बड़झाले की जाँच शायद किसी प्रशासन अधिकारी में साहस नही होगा कि उस फाइल को हाथ लगा सकें।निर्माण कार्य से लेकर फ्लेक्सी और पोस्टर तक कि ठेकेदारी चलाने वाले लोग अब नगरपालिका का बखान करने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री जी आमंत्रित कर रहे हैं आपको बता दें कि इनके नाम के घोटाले पहले भी मप्र में चर्चा के विषय रहे हैं और कोर्ट और न्यायालय की शरण जाकर इनके घोटालों और जाँच को प्रभावी बनाया गया।

मानवीय संवेदना की बात करें तो कफ सिरप पीकर 25 से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हुई और दूषित पानी पीकर 33 मौतें हो चुकी हैं किंतु उन शहरों के विकास और विकास के सोपानों की चर्चा बंद हो चुकी हैं 8 बार से स्वच्छता का खिताब जीतने वाले इंदौर ने दूषित पानी पीने से 33 लोगों की मौत का भी खिताब जीता शायद उस पर बहस और चर्चा अब सत्ताधारी नेताओं के जुबाँ पर नही है।
दूषित पानी की बात करें तो धनपुरी नगरपालिका में भी वाटर फिल्टर प्लांट और दूषित जल का विरोध विपक्ष सड़क पर उतरकर कर रहा है उम्मीद है इस उद्घाटन की कड़ी में संवेदनशील मुख्यमंत्री दूषित पानी की समस्या का शिलान्यास करके जाएंगे और लोकतंत्र की संवैधानिक व्यवस्था में जनता को उनकी बुनियादी समस्याओं से निजात दिलाएंगे वाटरपार्क उन अमीर जयचन्दों के लिए है जिन्हें तालाब,और नदी से परहेज है नही तो आजादी के 77 वर्ष बाद भी गांव देहात में तैराक नदी और तालाबो में ही तैरते हैं अगर वाटरपार्क विकास है तो पीने का पानी और वाटर फिल्टर प्लांट के नगरवासियों को शायद पीने का पानी नही बल्कि उसमें रस्सी डालकर तैरने का अभ्यास करना चाहिए ताकि वाटर पार्क का पानी तैरने के लिए और फिल्टर प्लांट का पानी भी तैरने के लिए काम आ जाए।खैर ख़बरों की अपनी मर्यादा और सीमा है आगे
आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने लिखा है कि वाटर पार्क उद्घाटन से पहले नगर पालिका परिषद धनपुरी को जमीन खसरा नम्बर 129 का भूभाटक 98 लाख रुपये शासन मद मे शहडोल कलेक्टर ऑफिस मे जमा करने का आदेश का पालन करना चाहिए, क्युकि उक्त आदेश तत्कालीन कलेक्टर मुकेश शुक्ला ने किया था जिस आदेश का पालन नगर पालिका परिषद ने नहीं किया है, इस मामले को कलेक्टर ऑफिस के रीडर भोला और वेदप्रकाश राजस्व निरीक्षक द्वारा फाइल तैयार कलेक्टर के आदेश के बाद किया गया था, किंतु आज तक उस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, और नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष के द्वारा राशि जमा किए बिना ही अवैध तरीके से वाटर पार्क का निर्माण किया गया है जब तक यह राशि जमा नहीं होता तब तक यह जमीन नगर पालिका के नाम पर राजस्व रिकार्ड मे दर्ज नहीं होगा, और जब तक इस जमीन का मालिकाना हक नगर पालिका के नाम दर्ज नहीं होगा, तब तक यह निर्माण वैध नहीं माना जाएगा और नगर पालिका अपने हैंडओवर नहीं ले सकती है, और ऐसे विवादित उद्घाटन को माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा किया जाना अनुचित होगा.. इसलिए इन सारी चीजों की जानकारी शहडोल कलेक्टर को माननीय मुख्यमंत्री को देना चाहिए, क्युकि मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप मे कलेक्टर जिले मे मौजूद होते है… और खुद कलेक्टर के आदेश का पालन जो परिषद ना किया हो उसके खिलाफ पहले राजस्व वसूली की कार्यवाही होनी चाहिए.. उसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए, जब वसूली हो जाए और नगर पालिका के नाम जमीन हो जाए तब यह उद्घाटन समारोह परिषद करा सकता है इसलिए 98 लाख की राशि वसूली उपरांत ही विधिक रूप से कोई प्रोग्राम मुख्यमंत्री के आयोजित करने चाहिए… इसलिए मांग है कि परिषद 98 लाख का जो गोल माल किया है उसकी जांच होनी चाहिए।
अब हम इस बात के विशेष जानकार नही है कि कब कहाँ और किस कलेक्टर ने ऐसा आदेश किया वकील न्याय की सीढ़ी के प्रथम सिपाही हैं उनकी दलीलों और अपीलों पर शक करना शक से बेईमानी करना है इसलिए दादा प्रदीप सिंह की इस दलील और अपील को आप लोग स्मरण करें और तय करें कि वाटरपार्क जरूरी है या स्वच्छ पानी..?

इनका कहना है..

जिला काँग्रेस इस कार्यक्रम का विरोध करेगी और प्रशासनिक ढील का भी,जिस तरह से जिले में अवैध गतिविधियां संचालित हैं उसमें प्रशासन की अहम भूमिका है, अजय अवस्थी काँग्रेस जिलाध्यक्ष

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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