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कुर्सी, कांग्रेस,और झंडा के बीच जीतू पटवारी की क्लास

कुर्सी, कांग्रेसी और पटवारी की क्लास

जिले की राजनीति में फूलों की बारिश, अपने ही पार्टी को किया दागदार
कहीं लाठी,कहीं जेल,तो कहीं हो रही थी फूलों की बारिश

फूल छाप कांग्रेसियो की पुरानी आदत

 

 

शहडोल।।

बीते 8 फरवरी को शहडोल जिले में मुख्यमंत्री के आने से सियासत इस कदर परवान चढ़ी की उसकी चर्चा सीधे मप्र स्तर तक हो गई। जितनी चर्चा भाजपा के निर्माण कार्य और उद्घाटन कि नही हुई उससे कहीं ज्यादा चर्चा कांग्रेसियो की हुई भाजपा बहुत कुछ पाकर भी वह औरा हासिल नही कर सकी जितना कि कांग्रेसियो की जेल,रिहाई और डंडे की मार ने सुर्खियां बटोरी।किन्तु इन सबके बीच जो हर जुबाँ पर चुटकी के रूप में है वो है कांग्रेसी कार्यकर्ता का मंचासीन होना और फूलों की वर्षा करना, एक तरफ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता जेल जा रहे थे दूसरी ओर काले झंडे के रूप में विरोध जता रहे थे तो एक खेमा ढीठता की सारी हदें पारकर कुर्सी पर बैठे रहे और मुख्यमंत्री द्वारा अपने ही नेताओं और प्रधानमंत्री को कोसते हुए सुन रहे थे।अहम बात तो ये भी है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी की आज पूरे दिन कोई प्रतिक्रिया देखने को नही मिली वहीं जानकारी के अनुसार उनके तीन कार्यकर्ता को जेल भी भेज दिया गया था आरोप तो ये भी है कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए जो कार्यकर्ता सलाख़ों के पीछे पहुँच गए उसके लिए खड़े होने का समय समूचे जिला के कांग्रेसी नही जुटा पाए और न ही कि इसका विरोध कर सकें अब आगमी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी आकर इस बिखरी हुई कांग्रेस को सवार पाते हैं या फिर यूँ ही कोई काला झंडा दिखाएगा कोई भाजपा के कार्यक्रम में मंचासीन होकर कांग्रेस के जले पर मरहम लगाएगा।

राजनीति या कोई कॉमेडी शो…

जिले की कांग्रेस राजनीति इन दिनों किसी कॉमेडी शो से कम नहीं लग रही। कार्यक्रम में कुर्सी पर बैठे कांग्रेसी नेता ऐसे जमे हैं मानो कुर्सी नहीं, राजगद्दी हो। इनके अपने ही कार्यकर्ता सांथी बाहर धूप में झुलसकर लाठी खा रही थी, लेकिन के भीतर भाजपा नेताओं की दुनिया में बस फूलों की वर्षा और सेल्फी का उत्सव मना रहे थे।
आरोप है कि सबसे शर्मनाक घटना तब सामने आई जब जिलाध्यक्ष ने अपने ही पार्टी कार्यकर्ता को पहचानने से इनकार कर दिया।
अब चर्चा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष “जीतू” सबकी क्लास लेने वाले हैं। शहडोल जिले की सियासी गलियारों में एक सवाल गूंज रहा है की क्या जीतू सच में संगठन को अनुशासन सिखाएंगे? या फिर यह भी सिर्फ़ प्रेस कांफ्रेंस और ट्विटर क्लास तक सीमित रहेगा?
क्योंकि यहाँ क्लास लेने से पहले कुर्सी से उठना पड़ता है, और कुर्सी छोड़ना… राजनीति में सबसे कठिन पाठ माना जाता है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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