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रूसी तेल पर सियासी बयानबाज़ी, मॉस्को ने ट्रंप के दावे को किया खारिज

भारत के रूस से कच्चा तेल आयात को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान ने हलचल पैदा कर दी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर सकता है। हालांकि रूस ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है और स्पष्ट किया है कि उसे भारत की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने रूसी संसद में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि ट्रंप के अलावा किसी और नेता ने यह नहीं कहा है कि भारत रूसी तेल आयात रोक देगा। उन्होंने विशेष रूप से भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है।

रणनीतिक संबंधों पर भरोसा

लावरोव ने दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin की भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन समझौतों ने रूस-भारत संबंधों को और मजबूत आधार दिया है। उन्होंने इसे “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लंबे समय से जारी है। ऊर्जा क्षेत्र में यह साझेदारी हाल के वर्षों में और गहरी हुई है, खासकर तब जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए।

भारत की ऊर्जा नीति

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को कम लागत पर पूरा करने में मदद मिली। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता रही है।

भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेगा। ऐसे में रूसी तेल आयात पर किसी भी तरह का निर्णय भी आर्थिक और रणनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

ब्रिक्स मंच पर आगे की दिशा

लावरोव ने यह भी संकेत दिया कि भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात हो सकती है। इस मंच पर ऊर्जा, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।

रूस ने दोहराया है कि वह भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और संभावनाएं असीमित हैं।

निष्कर्ष

फिलहाल उपलब्ध बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत द्वारा रूसी तेल आयात बंद करने की खबरें अटकलों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाजी होती रहती है, लेकिन वास्तविक नीति निर्णय आर्थिक हितों और रणनीतिक साझेदारी के आधार पर तय होते हैं। भारत और रूस के बीच मौजूदा सहयोग को देखते हुए निकट भविष्य में इस साझेदारी में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम नजर आती है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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