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भाजपा का नया नैरेटिव: नाबालिग छात्र पर राजनीति,

भाजपा का नया नैरेटिव: नाबालिग छात्र पर राजनीति, अपनी नाकामियां छिपाने की नापाक कोशिश

विपक्ष के सवालों का नायाब तरीका: नैरेटिव सेट.?

शहडोल प्रवास पर होंगे आज जीतू पटवारी

भोपाल/प्रदेश 

 

भाजपा ने एक बार फिर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नया नैरेटिव गढ़ लिया है। बीते 8 फरवरी को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने के एवज में शहडोल कलेक्टर ने उन काँग्रेस प्रदर्शनकारियों पर डंडा बरसाया बाद में उन्हें जेल भेजा गया जेल भेजने में जिला प्रशासन से चूक हो गई और उस भीड़ में एक नाबालिग छात्र निकला जिसका 10 फरवरी को 12वीं कक्षा का अंग्रेजी विषय का पेपर था जिला प्रशासन अपनी कमियों को ढँकने के लिए पूरे पिक्चर की पंच लाइन से लेकर स्क्रिप्ट बदल दी और फैक्ट चेक के माध्यम से जारी किया गया कि ये बालक की अपनी मनःस्थिति थी कि उसने पेपर नही दिया। दूषित पानी,गौवंश तस्करी और उनका मांस निर्यात,अवैध गतिविधियों और नाबालिग छात्र को जेल में डालने और उसके बाल्यकाल से खिलवाड़ कर उसे परीक्षा से वंचित करने जैसे मुद्दों पर हिसाब माँगने आज जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल आ रहे हैं वैसे ही कल से सोशल मीडिया भाजपा आईटीसेल और कुछ भाजपाई अपने सरकार की नाकामियां छिपाने के लिए ‘फेसबुक’ में एक ‘नैरेटिव’ चला रहे हैं कि- “नाबालिग को रैली में किसने लाया और क्यों बुलाया” जैसे सैकड़ो पोस्ट से फेसबुक पेज भरा पड़ा है।

 

 

 

इसमें कोई संदेह नही की भाजपा सरकार से जब भी असल मुद्दों और बीमारी का इलाज पूँछो तो भाजपा बगैर बीमारी का इलाज किए एक नए बीमारी का अविष्कार कर लेती है।
देश मे विपक्ष द्वारा चर्चा एप्सटीन फाइल पर हो रही है, सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब प्रकाशित क्यों नही हुई इस बात पर हो रही है,भारत ने अमेरिका से 18% टैरिफ ट्रेड डील क्यों कि जैसे मुद्दों की जवाब देने की बजाय बहस हो रही है राहुल गांधी को संसद से विशेषाधिकार हनन के मामले में हटाने की,
बात जब असल मुद्दों पर होती है तो बहस नेहरू और 67 सालों का हिसाब लिया जाने लगता है बीमारी का इलाज नही बल्कि नई बीमारी ढूढ़ ली जाती है।
मप्र के इंदौर में 30 से ज्यादा मौतें दूषित पानी पीने से हुई छिंदवाड़ा में 25 से ज्यादा मौतें कफ सिरप पीने से हुई,ऐसे में जनता या पत्रकार सवाल जीतू पटवारी, उमंग सिंघार या कांग्रेसियो से पूँछे कि जनता की जवाबदेह सरकार से, पूरे देश-प्रदेश में हिंदुत्व के एजेंडे पर सरकार चलाने वाली सरकार गौवंश तस्करी और उसके माँस निर्यात पर रोक क्यों नही लगा सकी।

 


इसी गौवंश तस्करी,दूषित पानी,भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर सवाल करने के लिए जब विपक्ष सरकार से सवाल करता है तब उस पर डंडे बरसाए जाते हैं।
स्थानीय सत्ता बजाय सवाल का जवाब देने और उन विषयों पर मुखर होने की बल्कि इस पर नैरेटिव सेट कर रही है।

सवाल आम जनता के…

जब सरकार के पास बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा संकट और छात्र हितों पर कोई ठोस जवाब नहीं होता, तब ऐसे मुद्दों को हवा दी जाती है। भाजपा का पूरा इकोसिस्टम अब यह साबित करने में जुट गया है कि नाबालिग का प्रदर्शन में आना कोई साजिश है—जबकि असली साजिश जनता को भ्रमित करना है।
जिस प्रकार से एक नाबालिग को बंधक बनाया गया यह उसके बाल अधिकार कब हनन है विपक्ष ने भाजपा के रवैये को खतरनाक और अलोकतांत्रिक बताया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है चाहे वह छात्र हो या युवा। लेकिन भाजपा समर्थित नैरेटिव बच्चों के अधिकारों और उनके स्वतंत्र विचार पर सीधा हमला है।
विपक्षी नेताओं ने तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा को नाबालिग छात्र से नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाली पीढ़ी से डर लग रहा है। जब युवा सड़कों पर उतरते हैं, तब सरकार उन्हें बदनाम करने की कोशिश करती है, ताकि जनता असली मुद्दों को भूल जाए।
खैर सत्ता से एक सवाल अंतिम में बनता है-सरकार बच्चों और छात्रों के भविष्य पर बात करेगी या सिर्फ सोशल मीडिया में नैरेटिव की राजनीति में ही उलझी रहेगी?

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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