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सोन नदी में तैरता मिला शालीग्राम, अब माननीय की राह पर

सोन नदी में तैरता मिला शालीग्राम, अब माननीय की राह पर
शहडोल।

मुख्यमंत्री क्या आए पूरे जिले में उथल-पुथल हो गई वैसा वाला उथल पुथल नही की भगवान विष्णु वृंदा यानी तुलसी के शालिग्राम बन जाएं बल्कि शबरी के लिए राम बन जाएं और शबरी के जूँठे बैर खाकर पूरे सृष्टि को प्रेम की पाठशाला पढ़ाकर जाति कुप्रथा पर प्रश्नचिन्ह लगा दें।
खैर छोड़िए ये त्रेता युग की बात थी अब कलयुग है और कलयुग में माता शबरी स्थल में मुख्यमंत्री ने सभी को माता शबरी का पाठ पढ़ाया पर इस प्रचार प्रसार का श्रेय माननीय जी ने शालिग्राम को दे दिया और शालिग्राम त्रेता से लेकर द्वापर तक यानी बुढ़ार से लेकर ब्यौहारी-जयसिंहनगर तक ख्याति प्राप्त कर ली।
बात सुनहरी रेत की हो या हरी-भरी लकड़ियों की पैसा तो दोनों ही देते हैं अब रेत में जुगाड़ माननीय की कृपा से हुई या फिर रेत में शालिग्राम का अपना अलग वर्चस्व सदियों से रहा है जैसा है।
शहडोल जिले में सोन नदी से एक दुर्लभ शालीग्राम मिलने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि यह शालीग्राम इन दिनों सोन नदी में तैरता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसे स्थानीय लोग बड़ी श्रद्धा से निकालना तो चाहते हैं पर माननीय की कृपा उन पर बनी हुई है अब सोन शालिग्राम और माननीय का आपस मे क्या कनेक्शन है ये तो शालिग्राम ही जानें क्योंकि शालिग्राम तो सोन,समुद्र और रेत के किनारे वास करता है उसका भला रेत नदी समुद्र से नाता कैसे टूट सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि शालीग्राम भगवान विष्णु का प्रतीक है और इसे शुभ व चमत्कारी माना जाता है इसलिए इसे रेत से नही निकाला जा सकता।

सूत्रों के अनुसार, यह शालीग्राम अब “माननीय” परछाई की है, जिसके चलते प्रशासन और राजनीतिक धुरंधर भी शालिग्राम को नदी से बाहर नही कर सकते। मजे की बात तो ये है कि स्थानीय पंडितों और धर्माचार्यों का कहना है कि शालीग्राम का नदी में तैरते मिलना दुर्लभ घटना है और इसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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