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इलाज के नाम पर स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली लूट

इलाज के नाम पर स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली लूट

महिला को दिया गलत इंजेक्शन तड़पती छोड़ अस्पताल से भागा डॉक्टर

पहले भी लगे हैं आरोप, फिर भी खुलेआम कर रहा इलाज!

 

शहडोल।

धरती के भगवान,खुदा,मसीहा कहे जाने वाले चिकित्सीय व्यवस्था को एक नायाब धंधा बनाकर रखे हैं हालात इस तरह बद्दतर हैं के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर सरकारी अस्पतालों के सामने ही निजी क्लीनिक चला रहे हैं और निजी डॉक्टर इनके प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं बेस्ट की होड़ में दिखने के लिए बड़े-बड़े बैनर पोस्टर और होर्डिंग में इनकी योग्यताओं सहित इनके दवाइयों का पैमाना बकायदे उन प्रचार सामग्रियों में लिखे रहते हैं।
सरकारी अस्पतालों में सर्विस देन वाले डाक्टरों की सूची बनाइए और देखिए कि इनमें से कितने डाक्टरों के पास क्लीनिक खोलने का रजिस्ट्रेशन है और ये किन-किन मेडिकल स्टोरों और पैथालॉजी में जाँच लिखते हैं और वहाँ से इनको कितना कमीशन अर्जित हो रहा है इनके इस उदासीन रवैये के कारण लोग निजी चिकित्सा व्यवस्था लेने के लिए मजबूर होते हैं और पीयूष सिंह जैसे डाक्टरों से पाला पड़ता है जो बीमारी के विपरीत इलाज कर मरीज को मौत के मुह में छोड़कर भाग जाते हैं।
शहडोल जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुढ़ार के स्वास्तिक हेल्थ केयर अस्पताल में एक तथाकथित मसीहा डॉक्टर ने इलाज के नाम पर एक महिला की जिंदगी दांव पर लगा दी और गंभीर हालत में मरीज को छोड़कर फरार हो गया।
पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन के कारण महिला की आंखों की रोशनी तक खतरे में पड़ गई है, जबकि डॉक्टर ने जिम्मेदारी लेने के बजाय मरीज को तड़पता छोड़ दिया।

भर्ती कराने का दबाव, मना करने पर बदसलूकी..

पीड़ित मनोहर लाल जगवानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 11 फरवरी की शाम करीब 7:30 बजे वह अपनी पत्नी बबिता जगवानी को चक्कर आने की शिकायत पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
आरोप है कि डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने बिना किसी जांच के मरीज को जबरन भर्ती कराने का दबाव बनाया। जब परिजनों ने सुबह आने की बात कही, तो डॉक्टर आगबबूला हो गया और अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगा।

जांच रिपोर्ट से पहले ठोंक दिए तीन इंजेक्शन..

डॉक्टर की लापरवाही यहीं नहीं रुकी। बिना ब्लड रिपोर्ट, ईसीजी या एक्स-रे का इंतजार किए डॉक्टर ने महिला को ताबड़तोड़ तीन इंजेक्शन लगा दिए।
इंजेक्शन लगते ही महिला की हालत बिगड़ गई, उन्हें धुंधला दिखाई देने लगा और घबराहट बढ़ गई।
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने मदद करने के बजाय चिल्लाते हुए कहा—
“जब मरने लगते हो तभी अस्पताल आते हो, मेरे भी बीवी-बच्चे हैं, रात भर तुम्हारी सेवा नहीं करूंगा।”
गंभीर हालत में मरीज को छोड़कर फरार हुआ डॉक्टर
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर बिना किसी प्राथमिक उपचार या डिस्चार्ज प्रक्रिया के मरीज को अकेला छोड़कर अस्पताल से भाग गया। पूरी रात परिवार दहशत में रहा।
अगली सुबह मरीज को शहडोल ले जाकर दूसरे डॉक्टर से इलाज शुरू कराया गया, लेकिन पीड़िता की आंखों में अब भी गंभीर समस्या बनी हुई है।
पहले भी कई मौतों का आरोप, फिर भी कार्रवाई नहीं!
स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी डॉ. पीयूष कुमार सिंह पर गलत इंजेक्शन और दवाइयों से कई मरीजों की मौत के आरोप लग चुके हैं।

एफआईआर और सख्त कार्रवाई…

 

पीड़ित परिवार ने बुढ़ार थाना प्रभारी को शिकायत देकर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सवाल यह है कि क्या ऐसे लोगों पर प्रशासन कार्यवाही करेगा या फिर ऐसे ही लापरवाह डॉक्टर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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