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शालीग्राम ही शालीग्राम…” जल हो या जंगल या फिर जमीन

शालीग्राम ही शालीग्राम…” जल हो या जंगल या फिर जमीन
शहडोल।।

 

“शालीग्राम ही शालीग्राम, जहाँ देखो शालीग्राम” — शहडोल जिले में यह पंक्ति इन दिनों चर्चाओं में है। आरोप है कि जिले में लकड़ी के कारोबार से शुरुआत करने वाले शालीग्राम ने कुछ ही समय में इतना प्रभाव बना लिया कि उनका नाम पूरे क्षेत्र में गूंजने लगा।इस नाम ने न सिर्फ समाज के प्रभावशाली लोगों में अपना वर्चस्व बनाया बल्कि सोशल मीडिया में पोस्ट डालते डालते और जन समर्थन लेने की होड़ में यह नाम माननीय के कंधे तक पहुँच गया हैरानी की बात है कि सिर्फ माननीय का चहेता नही बल्कि बीते दिनों गन्धिया में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सबका खास खैर रखने वाले शालीग्राम के हाथों खबरिया लोगों की खातिरदारी भी की गई।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, शालीग्राम का प्रभाव अब केवल लकड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेत और काले हीरे के अवैध कारोबार में भी साइलेंट फाइनेंस उनके सिंहासन को बढ़ा रहा है।
कुछ चिन्हित कारोबारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लकड़ी के परिवहन में उपयोग होने वाली टीपी में कथित तौर पर हेराफेरी और दस्तावेज़ों के खेल के जरिए अवैध लकड़ी को वैध दिखाकर इनके द्वारा बड़े पैमाने पर आज भी लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है।
मसीरा में इनके नाम के चर्चे और रेत का कारोबार भी इनके औरा को बढ़ाता रहा और पैसे की चमक से इनका अवैध काम वैध होता गया।
दबी जुबां लोगों ने कहा भैया अब तो बड़ी गाड़ी से लेकर ब्लैक डायमंड में भी इनका साइलेंट इन्वेस्टमेंट है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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