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खाट पर लेटा आदिवासी अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था : स्थानीय प्रतिनधियों की उपेक्षा, डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा जैतपुर केशवाही, झीकबिजुरी, रामपुर

दीपक पाण्डेय की रिपोर्ट

शहडोल।।

वैसे तो हमारे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को खुद तंदुरुस्ती की आवश्यकता है यहाँ बैठे कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी सरकारी कार्यो का महिमा मंडन तो जरूर पीटते हैं पर उनका ग्राउण्ड पड़ताल कुछ और ही है। जिले के अंतिम छोर में अस्पताल तो बनाए गए हैं पर उनमें या तो सुविधाओं का टोटा है या फिर अस्पताल सम्हालने वाले प्रबन्धन और उचित डॉक्टर की।

हमे जैतपुर ,केशवाही, और झीकबिजुरी चिकित्सालयों से ऐसी-ऐसी समस्याएँ लगातार वाट्सप के माध्यम से आ रही थी जिनका वास्तव में अवलोकन करना था।

झीकबिजुरी और जैतपुर में एक ही डॉक्टर है जिसके चलते एक ही डॉक्टर की ड्यूटी दोनों स्थान पर सप्ताह के दिनों के हिसाब से तय किया गया है ऐसे में कोई भी इमरजेंसी केस आने पर एक डॉक्टर एक ही स्थान पर उस केस को सम्हाल सकता है किन्तु विभाग ने इसकी पूर्ति नही की है। जैतपुर क्षेत्र व ग्राम से जुड़े लोगों ने आकस्मिक चिकित्सा से सम्बंधित हमे दर्जनों खामियाँ गिनाईं हलाकि इसका एक साफ उदारहण बीते दिनों साँप के काटने का इंजेक्शन न मिलने का वैसे भी जिले तक हलाकान था। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को सरकारी समाचार के रूप में इसका खण्डन करना पड़ा।

काश! की सीएमएचओ सफाई देने की बजाय जैतपुर क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था का ग्राउण्ड पड़ताल कर लेते।

झीकबिजुरी… 

यह इलाका किसी भी विभाग के कर्मचारी ,अधिकारी के लिए किसी काला पानी से कम नही है। इस क्षेत्र में जाने वाले कर्मचारी, अधिकारी मानो यहाँ का नाम सुनने मात्र से पसीने छूटने लगते हैं इसका मुख्य कारण है यहाँ की जमीनी सुविधाएँ रसातल पर हैं।

पेशेवर झोलाछाप के सहारे ग्रामीणों का स्वास्थ्य

खैर अब बात झीकबिजुरी की करें तो बीते कई वर्षों से यहाँ व यहाँ से लगे ग्रामीणों की चिकित्सा व्यवस्था एक पेशेवर झोलाछाप डॉक्टर पर निर्भर है। पेशेवर झोलाछाप की स्थिति ऐसी है मानो वह स्वयं एमबीबीएस है और अपने घर पर समस्त मेडिकल सुविधाओं को मुहैया करा रहा है।

एक ही छत के नीचे यहाँ मेडिकल दुकान से लेकर इंजेक्शन बॉटल व भर्ती होने तक कि सुविधाओं को प्रदाय किया जाता है।

खैर क्षेत्र के स्थानीय नेता और सांसद और विधायक देख लें कि उन्होंने आदिवासी बाहुल्य इन क्षेत्रों में कितना योगदान दिया है।

इसी तरह केशवाही और रामपुर में है दोनों स्थानों पर एक ही डॉक्टर, और चिकित्सा व्यवस्था दोनों की खाट पर लेटा है। केशवाही क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने बताया कि यहाँ की चिकित्सा व्यवस्था एक फार्मासिस्ट के भरोसे है जबकि रामपुर में पदस्थ डॉक्टर का हाल भी जैतपुर जैसे है।

हाँ स्थिति इतनी गम्भीर है कि यहाँ रेबीज का इंजेक्शन तक उपलब्ध नही है।

फिर भी आप अपने विकास कार्यो और उपलब्धियों का ढोल पीटते रहें ताकि आपको डॉक्टरों और स्वास्थ्य सम्बन्धी व्यवस्थाओं की कमी महसूस न हो।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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