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सचिन क्या बेंचता है? खली,चुनी या फिर शराब…

सचिन क्या बेंचता है?
खली,चुनी या फिर शराब…

शहडोल।

हम आप और ऐसे करोडों भारतीय जो क्रिकेट के शौकीन हैं 90 के दशक में मास्टर ब्लास्टर सचिन की बल्लेबाजी के कायल थे सचिन का आउट होना न तो दर्शकों को रास आता था न ही स्रोताओं को,हमने तो क्रिकेट और सचिन की ऐसी दीवानगी देखी है कि टीवी फूट जाते थे रेडियो बंद हो जाता था ।
खैर वो दौर था क्रिकेट से लेकर बाहरी दुनिया मे सचिन ही सचिन था नाम मात्र से कोई सचिन नही हो जाता आज के दौर में सचिन के नाम पर कई काले पीले चेहरे हैं इस मुखौटे में कोई काला है कोई गोरा किसी ने दाढ़ी रखी है किसी ने मूछ तो कोई क्लीन सेव है..
समाज मे बने रहने के लिए समाज का चादर ओढ़ना भी जरूरी है फ्रंट का धंधा भले ही ईमानदारी की हो पर पीछे का गोरखधंधा पर्दे में ही रहता है बात अहाते में सुरा शौकीनों का शौकीन में बैठना हो या फिर शराब का धंधा हो..बात पीने की हो या पिलाने की मयखाने से लेकर मय तक नाम तो सिर्फ सचिन का ही आता है वो अलग बात है कि क्रिकेट प्रेमियों को सचिन सिर्फ क्रिकेटर नजर आता है..
अभी के लिए इतना काफी है आगे बताएंगे कि सचिन का वो दौर जब क्रिकेट यानी एक ऐसे धंधे का जिसमे उसने पदार्पण किया था ….बुरा न मानो होली है..

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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