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भाजपा का बंगाल मॉडल: कैसे बदला राजनीतिक परिदृश्य और बढ़ी टक्कर

कोलकाता:
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में जिस तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है, वह राज्य की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव है।

कभी सीमित उपस्थिति वाली भाजपा ने एक दशक के भीतर खुद को राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित कर लिया है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन ने पार्टी के आत्मविश्वास को बढ़ाया।

2014 में जहां पार्टी को 17 प्रतिशत वोट मिले, वहीं 2019 में यह आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसी का असर 2021 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला, जहां भाजपा ने 77 सीटें हासिल कीं।

इस बदलाव के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। पहला, वाम दलों का लगातार कमजोर होना। दूसरा, कांग्रेस का प्रभाव घट जाना। तीसरा, भाजपा का आक्रामक चुनाव प्रचार और संगठनात्मक विस्तार।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अभी भी सत्ता में मजबूत है, लेकिन भाजपा की बढ़ती ताकत उसे लगातार चुनौती दे रही है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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