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सिलेंडर की भारी किल्लत: गैस की कमी से स्वाद फीका, न नए कनेक्शन मिल रहे हैं न रिफिलिंग, जुगाड़ भी व्यर्थ, सब त्रस्त

लखनऊ। शहर के आधे से अधिक रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों के लिए हालात चिंताजनक हो गए हैं। व्यावसायिक गैस कनेक्शन की भारी कमी के कारण उन्हें आवश्यक गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे इन प्रतिष्ठानों में खाना बनाने का कार्य बाधित हो रहा है और ग्राहकों को सेवाओं में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि नवाचार के लिए नए कनेक्शन भी अब प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से सिलेंडर की आपूर्ति में लगातार गिरावट आई है। कई प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं क्योंकि उन्हें आवश्यक गैस नहीं मिल पा रही। रिफिलिंग में देरी के कारण कर्मचारियों और ग्राहक दोनों को असुविधा हो रही है। इस बीच, जितना हो सके, जुगाड़ के प्रयास भी असफल साबित हो रहे हैं जिससे हालात और खराब हो रहे हैं।

व्यावसायिक गैस कनेक्शन के अभाव में कई होटल और ढाबा संचालकों ने गैर-मानक उपाय अपनाए हैं, जो गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन गैस के लिए आवेदन प्रक्रिया अभी स्थगित है, जिससे समस्या तीव्र हो गई है। सरकार भी इस समस्या को दूर करने के लिए कदम उठा रही है लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है।

इस संकट से न केवल व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी उच्च गुणवत्ता का भोजन प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। खाद्य पदार्थों का स्वाद घटने लगा है क्योंकि गैस की कमी के कारण खाना धीमी गति से पकता है। कई प्रतिष्ठान क्रेता क्षमता घटने से आर्थिक नुकसान सह रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या को जल्द से जल्द हल करने के लिए प्रशासन को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी तथा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना होगा। साथ ही उपभोक्ताओं को भी उचित मूल्यों पर गैस उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं बनानी आवश्यक हैं। अन्यथा लखनऊ के खाद्य व्यवसायों की दुर्दशा और बढ़ेगी और यह क्षेत्र आर्थिक रूप से भी प्रभावित होगा।

इस संकट का समाधान तभी संभव होगा जब सरकार, उद्योग और आपूर्तिकर्ता मिलकर व्यावसायिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करें। तभी लखनऊ के रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों को राहत मिलेगी और स्थानीय वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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