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सीबीएसई कक्षा दसवीं के परिणाम 2026: 93.7% उत्तीर्ण दर के बीच क्षेत्रीय और प्रशासकीय विभाजन गहराता जा रहा है

CBSE class X results 2026: 93.7% pass rate masks deepening regional and governance divide

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा दसवीं के परिणाम वर्ष 2026 घोषित कर दिए हैं, जिसमें कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 93.70% दर्ज किया गया है। superficially यह आंकड़ा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता प्रतीत होता है, लेकिन यदि गहराई से देखें तो इसमें कई संरचनात्मक अंतर और क्षेत्रीय असमानताएं छिपी हैं।

इस वर्ष की रिपोर्ट से पता चलता है कि पास प्रतिशत के साथ-साथ रीजनल डिस्पेरिटी यानी क्षेत्रीय असमानताएं काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड और अहलकौन इंटरनेशनल स्कूल के आंकड़ों और विशेषज्ञों की विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि कम्पार्टमेंट या फेल होने वाले छात्रों की संख्या कुछ क्षेत्रों में अधिक केंद्रित है। इससे यह संकेत मिलता है कि पढ़ाई के स्तर और तैयारी में क्षेत्रवार बड़ा अंतर मौजूद है।

इसके साथ ही यह भी देखा गया है कि केंद्रीय विद्यालयों और राज्य संचालित स्कूलों के बीच लगभग 8 अंकों की सफलतांतर है। केंद्रीय विद्यालयों के छात्र अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि राज्य स्कूलों में दक्षता आधारित मूल्यांकन की तैयारी अभी अधूरी है। यह बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के डुअल बोर्ड सिस्टम के पहले वर्ष की जांच में सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एनईपी के तहत जो कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (दक्षता आधारित मूल्यांकन) लागू किया गया है, उसके लिए सभी विद्यालय समान रूप से तैयार नहीं हैं। विशेष रूप से राज्य स्तर पर संसाधनों की कमी और ट्रेनिंग की अनुपलब्धता इस असमानता के प्रमुख कारण हैं।

दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड के एक शिक्षाविद ने कहा, “डुअल बोर्ड सिस्टम एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए सभी स्कूलों को समान अवसर और तैयारियां करनी होंगी। नयी विधाओं की समझ और आकलन पद्धति में बदलाव की वजह से कुछ क्षेत्रों में पिछड़ापन स्पष्ट रूप से दिख रहा है।”

अहलकों अंतरराष्ट्रीय स्कूल के प्रतिनिधि ने भी इस बात पर सहमति जताई कि परिणाम केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था के गहरे पहलुओं को उजागर करता है। उनका कहना था, “हमें शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और सभी बोर्डों के बीच तालमेल लाने की आवश्यकता है ताकि समग्र शिक्षा गुणवत्ता और समानता सुनिश्चित हो सके।”

अध्ययन से पता चलता है कि केवल उत्तीर्ण प्रतिशत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। स्तर के अंतर, संसाधनों की असमानता और क्षेत्रीय भेदभाव को भी दूर करना जरूरी है ताकि हर छात्र को समान शिक्षा का अवसर मिल सके। एनईपी के डुअल बोर्ड सिस्टम में इन कमियों को पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाना भविष्य के लिए आवश्यक होगा।

इस प्रकार, सीबीएसई के कक्षा दसवीं के 2026 के परिणाम न केवल सफलता की कहानी बताते हैं बल्कि शिक्षा प्रणाली में विद्यमान चुनौतियों और उनकी संभावित कमजोरियों का भी द्योतक हैं। आने वाले वर्षों में इन मुद्दों का समाधान किए बिना शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षित समता और गुणवत्ता हासिल नहीं हो सकेगी।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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