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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: शास्त्रीय नृत्य में फिटनेस का महत्व

International Yoga Day: Why fitness is crucial in classical dance

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर तीन युवा शास्त्रीय नृत्यों के कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने नृत्य की शारीरिक आधारभूमि और इसके द्वारा भाव प्रदर्शन पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रकाश डाला। ये कलाकार बताते हैं कि नृत्य न केवल कला का माध्यम है, बल्कि यह शारीरिक फिटनेस और मानसिक अनुशासन का भी प्रतिबिंब है।

पहली कलाकार माया शर्मा, जो कथक नृत्य की छात्रा हैं, कहती हैं कि फिटनेस नृत्य की आत्मा है। उन्होंने बताया, “शारीरिक मजबूती और लचक मेरे भावों को सही ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करती है। बिना अच्छी फिटनेस के गहन भावों को नृत्य के माध्यम से व्यक्त करना कठिन होता है।” योग अभ्यास उनके नियमित दिनचर्या का हिस्सा है, जो उन्हें मानसिक शांति और शरीर की मजबूती प्रदान करता है।

वहीं, भरतनाट्यम नृत्यांगना आरती मेहता ने बताया, “यह नृत्य न केवल शारीरिक व्यायाम है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त करने का भी एक माध्यम है। योग के अभ्यास से मेरी सहनशीलता और एकाग्रता बढ़ी है, जिससे मैं प्रदर्शन में अधिक भावपूर्ण हो पाती हूं।”

तीसरे कलाकार रोहन सिंह, जो ओडिसी में प्रशिक्षित हैं, कहते हैं कि नृत्य में शारीरिक स्वास्थ्य और भावों का सजीव चित्रण एक-दूसरे से जुड़े हैं। “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मैं सभी युवा कलाकारों से अपील करता हूं कि वे अपनी फिटनेस और योगाभ्यास को प्राथमिकता दें ताकि उनका कलात्मक प्रदर्शन बेहतर हो सके।”

विशेषज्ञों के अनुसार, योग और नियमित शारीरिक व्यायाम से न केवल नृत्य की तकनीकी गुणवत्ता में सुधार होता है बल्कि कलाकारों के भावों का प्रभाव भी गहरा होता है। फिट शरीर और मानसिक स्थिति कलाकार को भाव दर्शाने में पूर्णता प्रदान करती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में यह विचार महत्वपूर्ण हो जाता है कि योग और फिटनेस के जरिए कलाकार अपने कला रूप को और भी जीवंत एवं प्रभावशाली बना सकते हैं। तीनों युवा कलाकारों के अनुभव दर्शाते हैं कि शारीरिक और मानसिक फिटनेस नृत्य के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अनिवार्य है।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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