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आंतरिक शक्ति का पुंज – योग”

“आंतरिक शक्ति का पुंज – योग”
पटना।

शांत, संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है योग।
योग से मन प्रफुल्लित होता, और तन होता निरोग।।

योग भारतीय संस्कृति की पहचान है, गुरु का ज्ञान है।
योग संजीवनी बूटी, प्राणपुंज, संपूर्ण दर्शन-विज्ञान है।

योग हमें स्वावलंबन की सनातन परंपरा से जोड़ता है,
हमारे शरीर और आत्मा को जोड़कर एकाग्रता बढ़ाता है।

योग मनुष्य में कुशाग्रता, स्थिरता, अनुशासन लाता है।
कार्यक्षमता को बढ़ाता है, आत्म-शुद्धिकरण करता है।

योग करें, योग मानव को प्रकृति के साथ जोड़ता है।
नित्य योगाभ्यास मन के विकार और भ्रांति को तोड़ता है।

प्रतिदिन योगाभ्यास से आंतरिक शक्ति बढ़ जाती है।
योग से मानसिक तनाव, अवसाद से मुक्ति मिलती है।

आधुनिक जीवनशैली से बढ़ रहे हैं व्याधि और रोग।
आओ योग करें, प्राणायाम करें, काया बनाएं निरोग।

योग साधना है, जीने की कला है, हमारे लिए वरदान।
योग से स्वस्थ बने समाज, योगासन से विश्वकल्याण।

स्वरचित काव्य:
अनुपमा सिंह ‘सोनी’, पटना
_हिन्दी की कवयित्री-लेखिका_

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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