दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

राजनीतिजनक कीट: जानिए वे कीट जो भारत के मशहूर आम बनाते हैं

Kingmakers: Meet the insects that make India’s famed mangoes

मई में पेरू में एक ऐतिहासिक फैसला हुआ, जब बिना डंक वाले मधुमक्खियों को कानूनी अधिकार मिलने वाले पहले कीट के रूप में मान्यता दी गई। यह निर्णय इन कीटों के अस्तित्व, विकास और अदालत में प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कदम न केवल जैव विविधता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इकोसिस्टम में इनके योगदान को भी स्वीकार करता है।

बिना डंक वाली मधुमक्खियां, जिन्हें स्टिंगलेस बीज के नाम से जाना जाता है, पारंपरिक मधुमक्खियों से अलग होती हैं और ये मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। पेरू में मिलने वाली इन मधुमक्खियों ने यह मुकाम इसलिए हासिल किया है क्योंकि इनके अस्तित्व पर कई खतरे मंडरा रहे थे। कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव और विदेशी, गैर-स्थानीय कीटों के साथ मुकाबला इनके जीवन को प्रभावित कर रहा था।

इस निर्णय के तहत अब बिना डंक वाली मधुमक्खियों को कानूनी तौर पर संरक्षण मिलेगा। इसका तात्पर्य यह है कि इनके आवासों, प्रजनन स्थलों और प्राकृतिक परिवेशों की रक्षा की जाएगी, और इन पर कोई भी शत्रुतापूर्ण गतिविधि की कानूनी जांच हो सकेगी। साथ ही इनकी भलाई के लिए अदालतों में نمائندگی भी सुनिश्चित होगी, जो इनके हितों को सुनिश्चत करेगा।

जलवायु परिवर्तन के कारण जहां अनेक प्रजातियां संकट में हैं, वहीं इस निर्णय से यह संदेश जाता है कि छोटे और दिखाई न देने वाले जीवों की सुरक्षा भी मायने रखती है। कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग इन मधुमक्खियों को सीधे नुकसान पहुंचा रहा था, इसलिए अब संरक्षण के नियम कड़े होंगे। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियां और भी सुदृढ़ होंगी।

इस पहल को वैज्ञानिक समुदाय ने भी बड़ा समर्थन दिया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, बिना डंक वाली मधुमक्खियां पारिस्थितिकी तंत्र में परागण (पोलन) के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो कृषि उत्पादन और जैव विविधता के लिए अनिवार्य है। उनकी उपस्थिति से फल और वनस्पतियों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होता है।

पेरू का यह निर्णय अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल है कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों और प्रजातियों को कानूनी संरक्षण दिया जा सकता है ताकि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके। उम्मीद है कि भविष्य में और भी देशों एवं क्षेत्रीय निकायों द्वारा इस तरह के प्रभावशाली कदम उठाए जाएंगे।

वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी अधिकार देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता भी जरूरी है ताकि इन कीटों का संरक्षण व्यवहारिक रूप से सुनिश्चित हो सके। विज्ञान और नीति निर्माण के बीच समन्वय से ही प्राकृतिक विरासत को बचाया जा सकता है।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद पेरू में बिना डंक वाली मधुमक्खियों की प्रजातियों के लिए एक बेहतर भविष्य की दिशा में अहम प्रयास शुरू हो गए हैं, जो न सिर्फ पेरू बल्कि वैश्विक स्तर पर संरक्षण की नई मिसाल बनेंगे।

Source

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!